सूत्रों ने बताया कि एक ट्रांसमीटर की अधिकतम आयु दस वर्ष होती है, लेकिन 27 वर्ष से कठुआ के आकाशवाणी केंद्र के ट्रांसमीटर को न तो बदला गया और न ही इसके लिए किसी विकल्प को लाया गया। बीते एक दशक से ही ट्रांसमीटर में कभी कभार दिक्कतें भी सामने आती रही हैं, जिसकी वजह से कुछ मिनटों के लिए आकाशवाणी की सेवाएं तो प्रभावित होती रहीं, लेकिन इस साल ऐसा पहली बार हुआ कि दो दिन तक ट्रांसमीटर ठप रहा है।
कठुआ के लिए मंजूर निजी एफएम के संचालक इन दिनों अपना सेटअप लगाने में जुटे हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार आने वाले समय में आकाशवाणी कठुआ के बाद अब जल्द कठुआ और आसपास निजी रेडियो भी सुना जा सकेगा।
सूत्रों के अनुसार यह इस रेडियो के लिए गुजरात की एक कंपनी को लाइसेंस हासिल हुआ था, जिसके बाद बीते कुछ महीनों से आकाशवाणी कठुआ परिसर से लीज पर लिए गए टॉवर से ही इसे ऑपरेट किया जाएगा। हालांकि निजी रेडियो का स्टुडियो कठुआ में बनाए जाने की योजना नहीं है। ऐसे में इसे रिले रेडियो के रूप में प्रसारित किया जा सकता है। निजी रेडियो को आने वाले समय में 91.10 मेगाहर्ट्ज पर सुना जा सकेगा।