जम्मू-कश्मीर के एडवोकेट जनरल जहांगीर इकबाल गनेई ने शुक्रवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। जहांगीर खान के अनुसार राज्यपाल से निर्देश मिलने के तत्काल बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया और जब तक फिर से ज्वाइन करने का आग्रह नहीं मिलता, वह अलग रहेंगे।
जहांगीर गनेई ने कहा कि सरकार अस्तित्व में नहीं रहने के बावजूद वह पद पर बने रहे क्योंकि वह सुनिश्चित करना चाहते थे कि पूर्व मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद ने नीतियों को लेकर जो फैसले लिए, उनका अदालत में बचाव किया जा सके।
राज्यपाल वोहरा के प्रशासन ने राजनीतिक तौर पर हुई नियुक्तियों के पदाधिकारियों को इस्तीफा देने को कहा था। इसके चलते उन्होंने शुक्रवार को अथारिटी को इस्तीफा भेज दिया।
गनेई के कहा, ‘हालांकि मुख्य सचिव ने फोन कर मुझे पद पर बने रहने को कहा। पर मैंने शिष्टतापूर्वक कहा, नहीं। दोपहर 12.30 बजे आयुक्त सचिव (कानून) ने पद पर बने रहने के लिए फोन किया, लेकिन मैंने उन्हें भी नहीं कहा।’
अपने पद से इस्तीफा देने के बाद गनेई पांच मिनट तक कार्यालय में रहे और फिर निजी कार में रवाना हो गए। गनेई एडवोकेट जनरल बनने वाले सबसे युवा वकील हैं।