- नगर निगम ने जमीन, भवन और पार्किंग समेत कई दस्तावेज मांगे, लेकिन एसीबी की जांच का ब्योरा नहीं दिया
- पुराने आवंटियों और जिनकी मौत हो चुकी, उनके नाम भी पहुंचे नोटिस, कारोबारियों ने जताया रोष
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। जम्मू नगर निगम की ओर से रिहायशी इलाकों में चल रहे कारोबारी प्रतिष्ठानों और नरवाल फल मंडी में दुकानदारों को जारी नोटिसों को लेकर कारोबारियों की नाराजगी बढ़ती जा रही है। फल मंडी में जारी नोटिस में एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) की रिपोर्ट का हवाला दिया गया है, लेकिन यह नहीं बताया गया कि रिपोर्ट किस मामले में थी और उसमें क्या सामने आया। कारोबारियों का कहना है कि जब एसीबी की रिपोर्ट को आधार बनाया गया है तो जांच का विषय और उसमें सामने आई बात भी बताई जानी चाहिए। इसके अलावा कुछ नोटिस ऐसे लोगों के नाम भी पहुंचे हैं, जो सालों पहले दुकान छोड़ चुके हैं या जिनकी मौत हो चुकी है।
नगर निगम ने फल मंडी के दुकानदारों से जमीन के कागज, भवन की अनुमति, साइट प्लान, भवन की तस्वीरें, एनओसी, स्थानीय पार्किंग प्लान और कारोबार कब शुरू हुआ, इसका प्रमाण समेत कई दस्तावेज मांगे हैं। कारोबारियों का कहना है कि इतने दस्तावेज मांगने के बावजूद नोटिस में एसीबी की जांच का ब्योरा नहीं दिया गया। चैंबर ऑफ ट्रेडर्स फेडरेशन के अध्यक्ष नीरज आनंद ने कहा कि एसीबी रिपोर्ट को आधार बनाया गया है तो कारोबारियों को यह भी बताया जाना चाहिए कि जांच किस मामले में हुई थी। नरवाल फ्रूट मंडी के अध्यक्ष परवीन गुप्ता ने कहा कि नोटिस में पूरी जानकारी नहीं होने से दुकानदारों के सामने स्थिति साफ नहीं है।
सालों पहले दुकान छोड़ चुके लोगों के नाम भी पहुंचे नोटिस
कारोबारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि कुछ नोटिस ऐसे लोगों के नाम भी पहुंचे हैं, जिनके नाम पर वर्षों पहले दुकान आवंटित हुई थी, लेकिन वे काफी समय पहले दुकान छोड़ चुके हैं। कुछ मामलों में संबंधित व्यक्ति की मौत हो चुकी है और परिवार ने दुकान किसी दूसरे सदस्य के नाम कर दी है। इसके बावजूद नोटिस पुराने आवंटी के नाम भेजा गया है। कारोबारियों का कहना है कि ऐसे मामलों में नोटिस भेजने से पहले रिकॉर्ड और मौके की मौजूदा स्थिति का मिलान होना चाहिए था। यह निगम की लापरवाही को दिखाता है।
रंधावा ने विधानसभा में भी उठाया दुकानों के नोटिस का मुद्दा
विधानसभा में शून्यकाल के दौरान भाजपा विधायक विक्रम रंधावा ने भी दुकानदारों को जारी नोटिस का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि करीब 500 से 700 दुकानदारों को नोटिस दिए गए हैं और तीन दिन के भीतर जरूरी एनओसी पेश करने को कहा गया है। त्योहारों के सीजन में लंबे समय से कारोबार कर रहे दुकानदारों को इस तरह नोटिस मिलने से परेशानी बढ़ी है। कई दुकानदार 40-50 साल से कारोबार कर रहे हैं और कुछ दुकानें जेडीए की ओर से बनाई गई थीं। उन्होंने सरकार से नोटिस वापस लेने की मांग की और दुकानदारों की समस्या का बातचीत से समाधान निकालने की बात कही। उन्होंने कहा कि मांग नहीं मानी गई तो व्यापारियों को सड़कों पर उतरना पड़ सकता है।
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नगर निगम की कार्यशैली को लेकर भी उठ रहे सवाल
कारोबारी हलकों में नगर निगम की कार्यशैली को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। कारोबारियों ने बताया कि अप्रैल महीने में त्रिकुटा नगर में बन रहे एक छोटे मॉल में नगर निगम की ओर से कार्रवाई हुई थी। कुछ निर्माण को ध्वस्त भी किया था। लेकिन एक-दो दिन बाद ही नगर निगम की ओर से सारी आपत्ति वापस ले ली गईं। इसे लेकर उस समय भी शहर के व्यापारियों के बीच तरह-तरह की चर्चाएं हुईं थीं। अब इस मामले के बाद कारोबारी फिर नगर निगम की कार्यशैली को लेकर सवाल उठा रहे हैं।