- खाद्य आपूर्ति मंत्री सतीश शर्मा ने जिलावार रिपोर्ट भेजने के जारी किए आदेश
- सरकारी राशन वितरण के सभी केंद्रों पर औचक निरीक्षण के लिए पहुंचेंगे अधिकारी
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम (पीडीएस) के तहत किश्तवाड़ में सप्लाई 1,545 क्विंटल गेहूं के सैंपल फेल होने के बाद खाद्य आपूर्ति विभाग के मंत्री ने प्रदेश भर में पीडीएस की सप्लाई वाले वितरण केंद्रों की जांच के आदेश दिए हैं।
मंत्री सतीश शर्मा ने कहा कि किश्तवाड़ में गेहूं के सैंपल फेल होने के बाद विभाग पूरी तरह अलर्ट है। विभागीय अधिकारियों को अपने-अपने जिलों में रिपोर्ट तैयार कर जल्द से जल्द सरकार को भेजने के लिए कहा गया है। उन्होंने कहा कि इस लापरवाही में जो भी कसूरवार पाया गया, उसके खिलाफ बनती कार्रवाई की जाएगी।
मंत्री ने बताया कि न केवल गेहूं बल्कि सरकारी राशन वितरण के सभी केंद्रों पर सरकारी अधिकारी औचक निरीक्षण के लिए पहुंचेंगे। इस दौरान जांच में अगर खामियां पाई जाती हैं तो जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होगी। किश्तवाड़ में फेल हुए सैंपल वाली गेहूं की सप्लाई को हटाकर दूसरी सप्लाई भेजी गई है। अधिकारियों को सख्ती बढ़ाने के आदेश दिए गए हैं।
किश्तवाड़ में सप्लाई 1,545 क्विंटल
गेहूं के सैंपल फेल होने का मामला
बता दें कि किश्तवाड़ में सप्लाई किए गए गेहूं की लैब टेस्टिंग में बाहरी चीजें, मिनरल मैटर और एर्गोट (एक तरह की फंगस) तय सीमा से काफी ज्यादा पाए गए। यह नतीजे फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एफएसएसएआई) के तहत आती नेशनल फूड लेबोरेटरी, गाजियाबाद से मिले थे। किश्तवाड़ के मरवाह और वारवान इलाकों के लाभार्थियों ने 21 जून को जन-शिकायत बैठक में कहा था कि उन्हें सप्लाई किया जा रहा गेहूं खराब क्वालिटी का है और आटा पिसने के बाद उसका स्वाद कड़वा हो जाता है। इस शिकायत के बाद दोनों इलाकों के तहसीलदारों ने अपनी-अपनी रिपोर्ट प्रशासन को सौंपी थी। इसके बाद वितरित किए गेहूं के सैंपल लेकर गाजियाबाद लैब में जांच के लिए भेजे गए जिस पर सैंपल फेल हो गए। प्रभावित स्टॉक में मरवाह में 895 क्विंटल और वारवान में 650 क्विंटल गेहूं शामिल था।
उधर, पुंछ के डिप्टी कमिश्नर ने भी बताया था कि एक स्टोर से गेहूं के सैंपल पहले ही इकट्ठा करके लैब में भेजे जा चुके हैं। उनकी रिपोर्ट का इंतजार है। अब पुंछ से आने वाली रिपोर्ट से यह पता चलने की उम्मीद है कि क्वालिटी से जुड़ी ये दिक्कतें सिर्फ कुछ खास खेप तक ही सीमित हैं या फिर यह समस्या ज्यादा बड़े पैमाने पर है।