डीजीपी एसपी वैद ने अमर उजाला से विशेष बातचीत में कहा कि दक्षिण कश्मीर में स्थानीय आतंकियों की घर वापसी के प्रयास भी तेज किए गए हैं। आतंकियों की बातचीत उनके परिवार वालों से कराने के प्रयास हो रहे हैं। जो सरेंडर करते हैं उन्हें एक मौका दिया जाएगा। लेकिन जो बंदूक नहीं छोड़ते हैं, उन्हें अंजाम भुगतना होगा। अनंतनाग में शनिवार को पिछली मुठभेड़ में दोनों आतंकियों की बातचीत उनके परिवार वालों से कराई गई थी। एक ने सरेंडर कर दिया जबकि दूसरा आतंकी मारा गया।
उत्तरी कश्मीर से पाकिस्तानी आतंकियों का लगभग सफाया हो चुका है। उत्तरी कश्मीर में 60 फीसदी आतंकी पाकिस्तानी थे। अब कुछ स्थानीय आतंकी बचे हैं। दक्षिणी कश्मीर में स्थानीय आतंकियों की संख्या 95 फीसदी तक है। जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों की संख्या कम है। हिजबुल का इस क्षेत्र में आधार रहा है। अमरनाथ यात्रा से पहले जैश ए मोहम्मद के फिदायीन हमलावरों की घुसपैठ संभव है। इसके लिए सुरक्षा बलों को गृह मंत्रालय ने अलर्ट किया है।
जिंदा पकडे़ गए आतंकी ने बताए कई राज
अनंतनाग में जिंदा पकड़ा गया आतंकी इमरान रशीद भट है। वह अनंतनाग के श्री गुफवारा इलाके के सटकीपुरा का रहने वाला है। उसके पिता का नाम अब्दुल रशीद भट है। अनंतनाग के एपी हेडक्वार्टर ताहिर अशरफ ने अमर उजाला को बताया कि आतंकी 12वीं कक्षा का ड्राप आउट है और हिजबुल के ओवर ग्राउंड वर्करों ने बरगलाकर आतंकी बनाया। वह पत्थरबाज रहा है। बाद में ओवर ग्राउंड वर्कर और फिर आतंकी बना। उसने कई राज बताए हैं जो सुरक्षा बलों के लिए मददगार हो सकते हैं।
आतंकियों की जड़ें खोदने की तैयारी
अनंतनाग के एसएसपी अल्ताफ ने बताया कि अमरनाथ यात्रा से पहले आतंकियों की जड़ें खोदने की कार्ययोजना पर अमल हो रहा है। हिजबुल और लश्कर दोनों कमजोर हुए हैं। यही कारण है कि अब दोनों आतंकी संगठन मिलकर काम करने को मजबूर हुए हैं।