जम्मू। दुनिया के सबसे ऊंचे रण क्षेत्र सियाचिन से लेकर बंगाल की खाड़ी के बीच स्थित अंडमान-निकोबार के द्वीप तक कैप्टन बाना की बहादुरी अंकित हो गई है। करीब 35 साल पूर्व लद्दाख के सियाचिन गलेशियर पर बाना सिंह ने शौर्य और पराक्रम के नये शिखर को छूकर दुश्मन के होश उड़ा दिए थे। तत्कालीन नायब सूबेदार बाना सिंह और उनके साथी पाकिस्तानी सैनिकों पर इस कदर टूट पड़े थे कि कई मौके पर ढेर कर दिए गए और कई डर के मारे पहाड़ की इस चोटी से ही कूद गए। 21 हजार फुट की ऊंचाई पर इस चोटी पर पोस्ट का नाम पाकिस्तान ने कैद ए आजम पोस्ट रखा था। ऑपरेशन राजीव में बाना सिंह की बहादुरी को देखते हुए उन्हें परमवीर चक्र का सम्मान दिया गया। बाना की बहादुरी के सम्मान में इस चोटी का नाम भी बाना टॉप रख दिया गया। जिसकी लगातार निगरानी की जाती है। अब अंडमान-निकोबार के एक निर्जन द्वीप का नाम भी कैप्टन बाना सिंह के नाम रखा गया है।
आठ जैकलाई के नायब सूबेदार बाना सिंह ने पाकिस्तान से कैद पोस्ट खाली कराने की चुनौती को आगे बढ़कर स्वीकार किया था। 21 हजार फुट की ऊंचाई पर पाकिस्तान की कैद पोस्ट तक पहुंचने के लिए 457 मीटर ऊंची बर्फ की दीवार चढ़नी थी। बाना सिंह से पहले कई अधिकारी और जवान शहीद हो चुके थे। माइनस 50 डिग्री तापमान में बाना सिंह की टीम ने 26 जून 1987 को कैद पोस्ट पर पहुंचकर दुश्मन को चौंका दिया। पहले ग्रेनेड से चौकी उड़ाई और फिर बंदूकों के बट से प्रहार कर कई पाकिस्तानी सैनिकों को ढेर कर दिया गया। डर के मारे कई पाकिस्तानी सैनिक चोटी से ही कूद गए थे। कैप्टन बाना सिंह बताते हैं कि चौकी पर पाकिस्तानियाें का सफाया करने के बाद भूख भी लगी थी। पतीले में उन्हीं के चावल पकाकर खाए थे।
परमवीर कैप्टन बाना सिंह ने कहा, शहीदों और युद्ध के नायकों को किसी स्थान के नामकरण से सम्मान देना स्वागत योग्य है, लेकिन ऐसे कदम आज के युवाओं को बहुत बड़ी प्रेरणा देंगे, यह कहना मुश्किल है। बढ़ती नशाखोरी से आहत बाना सिंह ने कहा, नशाखोरी इतनी बढ़ रही है कि नशे की लत से ग्रस्त युवा अपने अभिभावकों की भी नहीं सुन रहे। इस पीढ़ी को बचाने के लिए सरकार को ड्रग्स और शराब पर पाबंदी लगानी होगी। बाना सिंह ने कहा, बढ़ती नशाखोरी की चुनौती भी एक बड़े संघर्ष की मांग करती है। इसमें सरकार और लोगों को आगे आना चाहिए ताकि पीढ़ी को बर्बाद होने से बचाया जा सके।