फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

श्री श्री रविशंकर अभिनव गुप्त यात्रा के साथ पहुंचे श्रीनगर, अलगाववादियों ने किया विरोध

Sat, 11 Jun 2016 11:33 PM IST
अमृतपाल सिंह बाली, अमर उजाला/श्रीनगर
विज्ञापन
श्री श्री रविशंकर - फोटो : File Photo
विज्ञापन
प्रसिद्ध दार्शनिक आचार्य अभिनव गुप्त के सहस्त्राब्दि समारोह के तहत अभिनव संदेश यात्रा शनिवार को श्रीनगर पहुंची। समारोह समिति के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष श्री श्री रविशंकर की अगुवाई में श्रीनगर के ज्येष्ठा माता मंदिर में कलश पूजन किया गया।
विज्ञापन


यात्रा को लेकर अलगाववादियों ने विरोध जताया था। साथ ही सरकार ने भी साफ तौर पर कहा था कि ऐसी किसी यात्रा को अनुमति नहीं दी जाएगी। मंदिर में आयोजित समारोह में श्री श्री रविशंकर ने कहा कि आचार्य अभिनव मानवता के पुजारी थे। इस वजह से सभी को मानवता को स्वीकार करते हुए आपसी भाईचारे तथा शांति के साथ रहना चाहिए।

संघ के सह कार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले ने कहा कि भारत में अब फिर से संस्कृत की ओर लोगों का रुझान बढ़ा है। सरकार की ओर से इसके प्रचार-प्रसार तथा पढ़ाई पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। आचार्य अभिनव गुप्त मानवता के पुजारी थे। वे कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग मानते थे। आज भी भारत कश्मीर को अपना अभिन्न अंग मानता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

​बीरवाह सील, सुरक्षा के तगड़े इंतजाम

shri shri ravishankar - फोटो : FILE PHOTO
समिति के जम्मू-कश्मीर के अध्यक्ष शिवप्रसाद रैना ने कहा कि आचार्य के शिवभक्ति के बताए मार्ग को अपनाने की जरूरत है। मन की विशालता को और विशाल करने की जरूरत है। इस अवसर पर पद्मश्री जवाहर लाल कौल, संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के डॉ. रजनीश शुक्ला, कोषाध्यक्ष अनिल गोयल, प्रदीप कौल आदि उपस्थित थे।

संचालन अजय भारती ने किया। संदेश यात्रा को कांचि और गोवा से रवाना किया गया था। पूरे देशभर में भ्रमण करने के बाद कलश यात्रा जम्मू-कश्मीर पहुंची। यहां लगभग 57 गोष्ठियां आचार्य अभिनव गुप्त पर आयोजित की गईं। इससे पहले शुक्रवार को क्षीर भवानी मंदिर में भी कार्यक्रम हुआ था। 

अभिनव संदेश यात्रा को लेकर बडगाम जिले में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। पुलिस के साथ ही पैरा मिलिट्री फोर्स भी तैनात थी। बीरवाह जहां भैरव गुफा है, उस इलाके को पूरी तरह सील कर दिया गया था। कहा जाता है कि इसी गुफा में आचार्य ने अपने शिष्यों के साथ समाधि ली थी। बीरवाह के सभी प्रवेश द्वारों पर कंटीले तार लगाए गए थे।

चेकिंग के बाद ही लोगों को आने-जाने दिया जा रहा था। जिला प्रशासन का कहना था कि सरकार की ओर से हिदायत मिलने के बाद एहतियातन इंतजाम किए गए थे ताकि कानून एवं सुरक्षा व्यवस्था की स्थिति न बिगड़ने पाए।

हालांकि, आचार्य अभिनव गुप्त सहस्त्राब्दि समारोह के जम्मू-कश्मीर प्रांत के अध्यक्ष शिवप्रसाद रैना का कहना है कि बीरवाह जाने का कोई भी कार्यक्रम नहीं था। यह समझ से परे है कि सरकार ने भी इस मसले पर जवाब दिया और विधानसभा में भी मुद्दा उठा। पहले से कार्यक्रम क्षीर भवानी और ज्येष्ठा माता मंदिर का था। 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें