किश्तवाड़ जिले में तेज बहाव में फंसी 300 किलो वजनी गर्भवती भालू को वन विभाग, सेना और स्थानीय लोगों ने 48 घंटे के कठिन रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद सुरक्षित बचाया। एक अन्य अभियान में भद्रवाह के जंगलों से एक भालू और उसके दो शावकों को भी सुरक्षित उनके प्राकृतिक आवास में लौटाया गया।
किश्तवाड़ जिले के चटरू इलाके में पहाड़ी से तेज बहती जलधारा के बीच से 300 किलोग्राम से अधिक वजन वाली एक गर्भवती काली भालू को बचाया गया। वह तेज बहाव में फंस गई थी और बाहर निकलने में पूरी तरह असफल थी। बचाव अभियान 48 घंटे चला।अधिकारियों ने बताया कि वन्यजीव संरक्षण विभाग ने मादा भालू को सुरक्षित निकाल लिया है।
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बचाव अभियान में 48 घंटे लग गए और इसके बाद उसे उसके प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया गया।वन्यजीव संरक्षण विभाग के रेंज अधिकारी शफर इकबाल ने बताया कि शुक्रवार को ग्रामीणों ने भालू को डांगर नाले की तेज धाराओं में फंसा देखा। इसके बाद उन्होंने वन्यजीव विभाग को सूचित किया। सूचना पर एक बचाव दल को तैनात किया गया। इकबाल ने कहा कि बचाव अभियान काफी मुश्किल था इसलिए सेना की स्थानीय इकाई और स्थानीय लोगों की मदद ली गई।
अधिकारी ने बताया कि तेज धारा में फंसी भालू बहुत बड़ी थी और उसका वजन 300 किलोग्राम से अधिक था। वह गर्भवती थी इसलिए उसे कोई नुकसान पहुंचाने से बचने के लिए बिना ट्रैंक्विलाइजर का इस्तेमाल किए ही अभियान पूरा किया। इसलिए अभियान में काफी समय लग गया।
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भद्रवाह में भी भालू और उसके दो शावक वापस जंगल में पहुंचाए अधिकारी ने बताया कि एक अन्य बचाव अभियान में डोडा जिले के भद्रवाह इलाके के हल्यान जंगल में एक भालू और उसके दो शावक बाहरी क्षेत्र में देखे गए और उन्हें सुरक्षित वापस जंगल में पहुंचा दिया गया। अधिकारी ने मनुष्यों और जानवरों दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जनता से अधिक जागरूकता और सहयोग का आह्वान किया। उन्होंने वनों और वन्यजीव गलियारों की सुरक्षा के लिए निरंतर प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया।