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J&K: 'पशु तस्करी की बढ़ती चुनौतियों पर नकेल कसने की तैयारी; संयुक्त फोरम बने, राजनीतिक तौर पर मजबूती जरूरी'

Sun, 01 Jun 2025 02:21 PM IST
निकिता गुप्ता अमर उजाला, नेटवर्क जम्मू

सार

जम्मू-कश्मीर में बढ़ती पशु तस्करी और गोहत्या को रोकने के लिए सामाजिक संगठनों ने संयुक्त फोरम बनाने और सख्त कानून लागू करने की मांग की है। उन्होंने राजनीतिक हस्तक्षेप, कड़ी कार्रवाई और गोशालाओं को आर्थिक मदद देने पर भी जोर दिया है।
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पशु तस्करी संबंधी अमर उजाला संवाद कार्यक्रम में शामिल विभिन्न संगठनों के सदस्य। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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प्रदेश में पशु तस्करी व इसमें संलिप्त लोगों की बढ़ती संख्या से जनमानस में आक्रोश है। वहीं सनातन धर्म के मानने वाले, पशु तस्करी खासकर गाय की तस्करी को लेकर प्रशासनिक सुस्ती व प्रभावी कानून की कमी से ख़फ़ा नजर आ रहे हैं। आक्रोश और नाराजगी वे सार्वजनिक मंच और अफसरों के समक्ष जाहिर भी कर रहे हैं।

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उन्होंने शनिवार को अमर उजाला कार्यालय में आयोजित संवाद के दौरान अपनी नाराजगी भी जताई और संयुक्त फोरम बनाने की मांग भी की। उनका कहना था कि एक संयुक्त फोरम बनाए जाने की जरूरत है। इसमें स्थानीय स्तर पर सांसद व विधायकों की भूमिका तय की जानी चाहिए।

पूर्व पार्षद पवन सिंह ने कहा कि पशु तस्करी जहां गंभीर अपराध है, गो तस्करी की घटनाएं इन दिनों शहर से लेकर पूरे प्रदेश में सामने आ रही हैं। इन पर सख्त कानून बनाकर रोक लगाए जाने की जिम्मेदारी प्रशासन व कार्यपालिका की है। इसको लेकर हमारे जनप्रतिनिधियों को जागरूकता दिखानी होगी। तभी वह आमजन के लिए भी संदेश दे सकेंगे।

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कार्यक्रम में इन्होंने भी उठाई समस्या और दिए सुझाव
मढ़ निवासी सामाजिक कार्यकर्ता गुलाब सिंह सलारिया, सामाजिक कार्यकर्ता शक्तिदत्त शर्मा, नटमंच से जुड़े डा. तरुण शर्मा, युवा राजपूत सभा के विशाल सिंह, रवि कुमार वर्मा, गोशाला संचालक, सामाजिक कार्यकर्ता मूवमेंट कल्कि से जुड़े संजीव दुबे, सामाजिक कार्यकर्ता राकेश सिंह राका, दलित महासभा के चेयरमैन विजय लोचन, शिवसेना यूबीटी के उपाध्यक्ष संजीव कोहली, शिवसेना के जम्मू-कश्मीर अध्यक्ष मनीश साहनी, सामाजिक कार्यकर्ता ठाकुर कन्याल चंद्र।

इनसेटगो तस्करी व गोहत्या के अपराध पर कम से कम फांसी की सजा हो
वर्तमान में जो कानून लागू किए गए हैं वे सख्त नहीं हैं। पुलिस जिन पशु तस्करों या गो तस्करों को पकड़ती है, उनको लचीले कानून के कारण जल्द ही जमानत मिल जाती है। अब जरूरी है कि कानून को सख्त बनाते हुए इसे लागू किया जाना चाहिए। शहर व प्रदेश में गोहत्या बंद कराने की जिम्मेदारी पुलिस प्रशासन के ऊपर है। इस तरफ गंभीरता से प्रयास करने की जरूरत है। अरविंद बंद्राल, अधिवक्ता

कठुआ से कश्मीर तक हो रही पशु तस्करी, पुलिस की आंखें बंद
शहर की सीमा से लेकर कश्मीर तक बड़े पैमाने पर पशु तस्करी खासकर गो तस्करी हो रही है। बड़ा सवाल यह है कि स्थानीय पुलिस के सहयोग के बिना क्या यह संभव हो सकता है। समाज की भी जिम्मेदारी है कि वह सामाजिक निगरानी तंत्र विकसित करे। स्थानीय पुलिस के सहयोग पर भी नजर रखी जानी चाहिए। जोरावर सिंह जमवाल, सामाजिक कार्यकर्ता
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जनप्रतिनिधियों को आवाज उठानी चाहिए
हमारे जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी बनती है कि वे पशु तस्करी, गो तस्करी के खिलाफ सदन में अपनी आवाज बुलंद करें। कानून सदन में ही बनेगा। इसके लिए एक उचित फोरम बनाए जाने की जरूरत है, जिसमें सभी ऐसे संगठन जो पशु तस्करी, गो तस्करी के खिलाफ काम कर रहे हैं। महंत रामेश्वर दास, सामाजिक कार्यकर्ता गोसेवक

पशु तस्करों पर पीएसए के तहत हो कार्रवाई
पूर्व में पीएसए के तहत कार्रवाई की जाती थी जो कि वर्तमान में बंद है। प्रदेश भर में 380 से अधिक पशु तस्करों, गोहत्या के खिलाफ प्रतिवर्ष दर्ज की जा रही हैं। मनीश साहनी, अध्यक्ष शिवसेना यूबीटी जम्मू-कश्मीर

यूपी की तरह गोशालाओं को आर्थिक मदद दी जाए
उत्तर प्रदेश सरकार ने जिस तरह आमजन को गोमाता के संरक्षण को लेकर जागरूक किया है। गोशालाओं को खोलने के साथ ही यहां पर गोमाता के लिए चारे हेतु आर्थिक मदद दी है। वहां से प्रेरित होकर वर्तमान सरकार भी इस दिशा में कदम उठा सकती है। राकेश सिंह राका, सामाजिक कार्यकर्ता

कानून की सख्ती ही नहीं, इसे लागू करना भी जरूरीमौजूदा समय में पशु तस्करों खासकर गोहत्या, गो तस्करी कर रहे संगठनों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई में प्रशासन शिथिलता बरत रहा है। सख्त कानून के साथ ही जरूरी है कि इसे लागू भी किया जाए। यह पूरे देश की समस्या है। नरोत्तम शर्मा, पूर्व पार्षद 
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