मेले में ऊंट की सवारी का आनंद लेते लोग।
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बाबा तालाब में लगाई आस्था की डुबकी
मेले के चौथे दिन भी श्रद्धालुओं में बाबा जित्तो के प्रति आस्था दिखी। चार नवंबर से लगातार श्रद्धालु बाबा के दरबार में हाजिरी लगाने आ रहे हैं। लोग बाबा तालाब में डुबकी लगाकर मन्नतें मांग रहे हैं। जम्मू के प्रवीण, आरती शर्मा, नेहा व मंजू ने बताया कि बाबा तालाब में स्नान करने से शरीर के रोग तो दूर होते ही हैं साथ ही साथ मन को भी शांति मिलती है। उनका मानना है कि बाबा तालाब में स्नान करने के बाद जो भी श्रद्धालु बाबा जित्तो से मन्नत मांगता है वह पूरी होती है।
बाबा तालाब सरोवर में स्नान करते श्रद्धालू, एवं बाबा जित्तो के दर्शनों के लिए कतार में खड़े श्रद्धालु।
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खूब भा रहा देसी कचालू और गन्ने का रस
झिड़ी मेले में अन्य राज्यों सहित जम्मू संभाग के लोग खुद को देसी कचालू और गन्ने के रस का आनंद उठाने से नहीं रोक पा रहे। मेला घूमने आई प्रिया और सीमा ने बताया कि खाने-पीने कि चीजें महंगी होती हैं लेकिन हर व्यक्ति जो मेला देखने आया है वो मेला घूमकर खाने-पीने के व्यंजनों का स्वाद भी चखेगा। उन्होंने बताया कि मेले में देसी कचालू का स्वाद ही कुछ अलग होता है जो शहर में नहीं मिलता।
नाटक प्रस्तुत करते कलाकार।
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नाटक से बाबा जित्तो की जीवनगाथा का मंचन
विश्व स्तर पर प्रशंसित और प्रतिष्ठित डोगरी नाटक बाबा जित्तो ने झिड़ी मेले के मुख्य मंच पर दूसरे दिन भी दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। नटरंग जम्मू के कलाकारों ने बाबा जित्तो की कहानी को मंच पर जीवंत कर दिया जिन्होंने जमींदारों के अत्याचार और शोषण के खिलाफ लड़ते हुए अपने प्राणों की आहुति दे दी। इस प्रस्तुति का सबसे खास पहलू यह था कि इसे उसी स्थान पर प्रस्तुत किया गया जहां सदियों पहले ये घटनाएं घटित हुई थीं।
युवाओं ने की खूब खरीदारी
झिड़ी मेले में लोग जमकर खरीदारी कर रहे हैं। युवतियां व महिलाएं मेकअप के साथ-साथ घर की साज-सजावट का सामान खरीद रही हैं। खरीदारी को लेकर युवाओं में भी काफी जोश देखा जा रहा है। मेले में आए युवा रोहित, जगदीश वर्मा, सुमित आदि का कहना है कि वे पिछले 12 वर्षों से मेले में आ रहे हैं। हर बार झिड़ी से ही वे खेल का सामान जैसे फुटबॉल, बैट, हॉकी और गेंद आदि खरीदते हैं। उन्होंने बताया कि बीते चार दिनों में तीन बार आ चुके हैं।