एक स्थानीय निवासी ने कहा कि वह एक ऐसी हस्ती थे जिन्हें सभी से प्यार था। वह इलाके के जाने-माने इंसान थे। उनकी मौत से इलाके में मातम का माहौल है। इलाके का हर इंसान आज दुखी है। जागर नाथ सहकारिता विभाग में ऑडिटर के पद से सेवानिवृत्त हुए थे।
बता दें कि मृतक जागर नाथ बट (95) ने कश्मीर उस वक्त भी नहीं छोड़ा था जब 1990 में उग्रवाद हावी था और कश्मीरी पंडितों के साथ बर्बरता हुई थी। इसके बाद भारी संख्या में कश्मीरी पंडितों को पलायन करना पड़ा था। लेकिन जागर नाथ अपने परिवार से साथ यहीं रुकने का फैसला किया था।