आरएस पुरा। गांव जिंदड़ मेहलू व चक नानक में किसानों की 123 कनाल खेतों में खड़ी गेहूं की फसल जलने पर प्रशासन के खिलाफ रोष जताया गया। किसानों ने कहा कि हर वर्ष गेहूं की फसल आग की भेंट चढ़ती है। सैकड़ों कनाल फसल जलकर राख हो जाती है। दुर्भाग्य की बात यह है कि किसान वर्षों से ऐसा नुकसान उठा रहे हैं लेकिन उनकी बेहतरी के लिए सरकार या प्रशासनिक स्तर से कारगर कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।
आरएस पुरा के कई गांवों में इस बार सैकड़ों कनाल गेहूं की फसल आग की भेंट चढ़ी है। दो दिन पूर्व भी जिंदड़ मेहलू और चक नानक गांव में किसानों की 123 कनाल गेहूं की फसल आग की भेंट चढ़ गई। किसान धर्मपाल सुखदेव राज, मखन चौधरी, दयाराम ने कहा कि किसानों की हर वर्ष गेहूं की फसल आग लगने से जल रही है। लेकिन प्रशासन की तरफ से इस दिशा में गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है। खेतों में लगी बिजली की लाइनों में स्पार्किंग के चलते किसानों को नुकसान उठाना पड़ता है। किसानों का कहना है कि प्रशासन की ओर से कोई पूछने तक नहीं आया।
आरएस पुरा के पूर्व विधायक प्रो. गारू राम भगत ने रविवार को गांव जिंदड़ मेहलू व चक नानक में पहुंच किसानों की गेहूं की फसल जलने पर मौका देखा और उन्होंने आश्वासन दिया कि उन्हें राहत दिलाए जाने के लिए उपायुक्त से मिल अपना पक्ष रखने के लिए कहा।
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किसान निडर होकर कर रहे फसल की कटाई
जीरो लाइन के आसपास फसल कटाई अभी बाकी
अमर उजाला ब्यूरो
अरनिया। सीमावर्ती क्षेत्र में इस समय सभी किसान कंबाइन मशीन से गेहूं की फसल की कटाई में लगे हुए हैं। वे सामान्य स्थिति में बिना किसी रुकावट व निडरता से फसल समेटने में जुटे हैं। हालांकि जीरो लाइन के आसपास फसल कटाई अभी बाकी है। शांतिपूर्वक हालात को देखते हुए उम्मीद जताई जा रही है कि इस बार सामान्य तरीके से फसल की कटाई पूरी कर ली जाएगी।
सीमावर्ती किसान मनोहर लाल, निरंजन सिंह, प्रकाश चंद, तिलक राज व शिवदेव सिंह का कहना है कि बीते एक दशक के बाद यह पहला मौका है जब लगभग सभी किसान बिना डरे सहमे व बिना किसी रोक टोक के अपनी गेहूं े की फसल काट रहे हैं। जिस प्रकार सीमा से मात्र थोड़ी ही दूरी पर हम कंबाइन मशीन से बिना डरे सहमे अपनी फसल को समेटने में जुटे हैं वैसे ही इस बार करीब एक साल से सीमा पर बनी शांति के चलते जीरो लाइन पर भी कटाई कर सकेंगे।
पूर्व सरपंच अवतार सिंह व रघुवीर सिंह का कहना है कि एक साल से सीमा पर हालात सामान्य बने रहने से इस बार कटाई करने कुछ अलग है। न तो पाकिस्तानी गोलाबारी का डर और न ही सुरक्षा को लेकर कोई रोक टोक, जिससे इस बार अपनी फसल समेटने का अंदाज ही अलग दिख रहा है और इसका पूरे श्रेय सीमा पर तैनात सीमा प्रहरियों के जवानों व उनके अधिकारियों को जाता है जो सीमा के उस पार नजर रखे हुए हैं।
हालांकि इस बार एक दशक से पाकिस्तान के रवैये को देखते हुए जीरो लाइन के पास बहुत ही कम किसानों ने गेहूं फसल की रोपाई की मगर फिर भी इक्का-दुक्का किसानों द्वारा बीजी गई फसल को भी सामान्य तरीके से काट लिया जाएगा।
बताते चलें कि गत वर्ष इन दिनों सीमा पर हालात काफी तनावपूर्ण बने थे, जिससे फसल की कटाई को किसानों ने लगभग डरे सहमे ही संपन्न किया था।
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फसल काटने के बाद खेत में आग न लगाएं
ज्यौड़ियां। कृषि अधिकारियों ने रविवार को क्षेत्र में किसान जागरूकता शिविर का आयोजन किया। इसमें किसानों को गेहूं की फसल की कटाई के पश्चात खेतों में आग नहीं लगाने तथा आग से खेतीबाड़ी को होने वाले नुकसान के प्रति जागरूक किया। कहा कि आग से खेतों में अगली फसल की पैदावार में नुकसान होता है और वातावरण में प्रदूषण फैलता है। ब्यूरो
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आग लगने से 10 कनाल गेहूं की फसल जली
विजयपुर/ बिश्नाह। शिव नगर में रविवार को गेहूं की फसल में आग लग गई। इसमें काफी फसल जलकर राख हो गई। रविवार को हुए इस अग्निकांड में किसान मंगत राम पुत्र राम धान निवासी कौठी की पांच कनाल गेहूं की फसल जलकर राख हुए। उन्होंने सरकार से मांग की है कि नुकसान का मुआवजा दिया जाए। ताकि उसकी परेशानी हल हो सके। क्योंकि हर किसान फसल पर ही निर्भर होता है। उधर बिश्नाह के गांव पटेयारी में रविवार शाम करीब साढ़े चार बजे गेहूं के खेतों में अचानक आग लग गई। इसमें दो किसानों की पांच कनाल खेतों में खड़ी गेहूं की फसल जलकर राख हो गई। सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची दमकल की टीम ने आग पर काबू पाकर उसे आगे बढ़ने रोक ा। मगर तब तक गगन शर्मा व अश्वनी कुमार नामक किसानों की पांच कनाल फसल जल कर राख हो गई। ब्यूरो