जम्मू। वर्तमान में जम्मू भी उड़ता पंजाब बनता जा रहा है। इस उड़ान को काबू करने के प्रयास कछुआ चाल से हो रहे हैं। आंकड़े बताते हैं कि हेरोइन (चिट्टा) का नशा युवाओं पर बड़े स्तर पर हावी हो रहा है। इससे निपटने के कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।
वर्तमान में 572 युवा सरकारी नशा मुक्त केंद्र में इलाज करा रहे हैं। इनमें से 400 युवा चिट्टे की लत में जकड़े हैं। पुलिस विभाग का भी एक नशा मुक्ति केंद्र हैं। यहां पर कई युवक हेरोइन की लत से परेशान होकर इलाज कराने पहुंचते हैं। सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि पुलिस के नशा मुक्ति केंद्र में इतने विशेष डाक्टर या फिर स्टाफ नहीं कि वह पांच से छह हफ्तों से अधिक समय तक उनका इलाज कर सकें।
दरअसल, जम्मू संभाग के 10 जिलों में सिर्फ जम्मू जिला ही ऐसा है, जहां पुलिस का नशा मुक्ति केंद्र है। बाकी के जिलों में हेरोइन के आदी निजी स्तर पर अपना इलाज कराते हैं।
सूत्रों का कहना है कि मेडिकल कालेज अस्पताल जम्मू में हर रोज एक मौत नशे की वजह से हो रही है। इनमें अधिकतर मौतें हेरोइन की लत को लेकर होती हैं। गैर सरकारी संस्था टीम जम्मू ने सर्वे किया था कि हर साल जम्मू संभाग में 200 मौतें हेरोइन और अन्य नशों की वजह से हो रही हैं। टीम के अध्यक्ष जोरावर सिंह जमवाल का कहना है कि हेरोइन का ग्राफ बहुत तेजी से बढ़ रहा है।
संभाग स्तर पर खुलना था केंद्र
पुलिस और स्वास्थ्य विभाग को मिलकर संभागीय स्तर का नशा मुक्ति केंद्र बनाना था। इसके लिए विजयपुर इलाके में जमीन देखी गई, लेकिन अभी तक काम नहीं शुरू हुआ। इसके लिए सभी जिलों में नशा मुक्ति केंद्र बनाने की योजना भी थी, लेकिन यह परवान नहीं चढ़ पाई।
600 मामले हेरोइन के
वर्ष 2018 में जम्मू-कश्मीर में ड्रग्स के 926 केस दर्ज हुए हैं। 1291 तस्करों को गिरफ्तार किया गया, लेकिन इन 926 मामलों में करीब 600 मामले हेरोइन के ही हैं। सिर्फ जम्मू जिले में ही 171 लोग हेरोइन की तस्करी करते हुए पकड़े गए हैं। देखा जाए तो हेरोइन की लत लगाने वाले तस्कर लगातार बढ़ रहे हैं।
हर रोज 100 नए युवा शिकार हो रहे
सरकारी आंकड़ों की मानें तो जम्मू कश्मीर में हर महीने 10 युवा हेरोइन की लत से जकड़ रहे हैं। जबकि निजी क्लीनिकों में जाने वालों की भी बात करें तो हर रोज 100 युवा ऐसे हैं, जो हेरोइन की वजह से परेशान होकर इलाज कराने जाते हैं। यह अलग बात है कि अभिभावक अपनी इज्जत के चलते इसकी जानकारी बाहर नहीं आने देते।
केंद्र से मंजूरी का इंतजार
श्रीनगर और जम्मू में दो सेंटर बनाने का प्रस्ताव बनाकर केंद्र को सौंपा गया था। इसमें से श्रीनगर का प्रस्ताव मंजूर हो गया, अब जम्मू का इंतजार कर रहे हैं। सेंटर चलाने के लिए स्वास्थ्य विभाग की काफी आवश्यकता पड़ती है। हमारी कोशिश है कि नशा मुक्ति केंद्रों को प्रभावी ढंग से चलाएं। इसमें कुछ वक्त लग सकता है, लेकिन मजबूती से शुरू होगा।
-मनोज शीरी, एआईजी कम्युनिकेशन, पुलिस मुख्यालय