जम्मू। राज्य सरकार ने जम्मू-कश्मीर प्रोजेक्ट्स कंस्ट्रक्शन कारपोरेशन (जेकेपीसीसी) के घोटोलों की जांच क्राइम ब्रांच को सौंप दी है। यह कार्रवाई फैक्ट फाइंडिंग कमेटी की रिपोर्ट पर की गई है। कार्रवाई यह संगठन में व्याप्त भ्रष्टाचार को खत्म करने, बैकडोर नियुक्तियों पर रोक लगाने, पारदर्शी संस्कृति लाने तथा संगठन की दक्षता बढ़ाने की दिशा में उठाया गया कदम है।
जेकेपीसीसी की कार्यप्रणाली खासकर ठेकों में भ्रष्टाचार, वरिष्ठ पदों समेत तमाम नियुक्तियों में धांधली तथा कार्य में देरी की वजह से लागत बढ़ने की तमाम शिकायतों पर सरकार ने फैक्ट फाइंडिंग कमेटी का गठन किया था। कमेटी में प्रमुख सचिव योजना, डिवकाम जम्मू, कमिश्नर सेक्रेटरी राजस्व तथा एमडी जेकेपीसीसी रखे गए थे। कमेटी ने शिकायतों की जांच कर विस्तृत रिपोर्ट सौंपी। रिपोर्ट के तथ्य चौंकाने वाले थे। इसके साथ ही संगठन की कार्यप्रणाली को बेहतर बनाने के लिए कई सुझाव दिए।
नवंबर 2015 के बाद के सभी कामों की जांच होगी
रिपोर्ट में कहा गया है कि निर्माण कार्यों के लिए ठेका दिया गया जबकि जेकेपीसीसी ने विभागीय आधार पर काम को कराया। यह सरकारी आदेश की अवहेलना है। कंसल्टेंट की नियुक्ति में भी एसओपी का पालन न किए जाने की बात सामने आई है। इसके मद्देनजर सरकार ने नवंबर 2015 के सभी कामों की जांच क्राइम ब्रांच श्रीनगर को सौंप दी है ताकि ठेका देने में गड़बड़ियों का पता लगाया जा सके।
एमडी की नियुक्ति में गड़बड़ी, होगी एफआईआर
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि संगठन को अस्तित्व में आए 50 साल होने के बाद भी कोई भर्ती नियम नहीं है। एमडी पद पर विकार मुस्तफा सोंथू की नियुक्ति भी सरकारी आदेशों की अवहेलना कर की गई। चेयरमैन, एमडी या डायरेक्टर की नियुक्ति कैबिनेट करेगी, जबकि एमडी की नियुक्ति चेयरमैन (तत्कालीन मंत्री) के द्वारा की गई जो इसके लिए सक्षम नहीं थे। सरकार ने एमडी की नियुक्त के मामले में एफआईआर के लिए क्राइम ब्रांच को अधिकृत किया। क्राइम ब्रांच चेयरमैन, बोर्ड आफ डायरेक्टर्स, प्रशासनिक सचिव तथा कंपनी सेक्रेटरी की भूमिका की भी जांच करेगी।
तीन महीने में सभी अवैध नियुक्तियां होंगी रद्द
फैक्ट फाइंडिंग कमेटी जेकेपीसीसी की ओर से की गई सभी नियुक्तियों की जांच करेगी। साथ ही यह सुनिश्चित करेगी कि सभी अवैध नियुक्तियां रद की जाएं और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई हो। यह काम तीन महीने में यानी 30 जून तक पूरा करने की समय सीमा निर्धारित की गई है। कमेटी के चेयरमैन के नाते प्रमुख सचिव योजना पूरी प्रक्रिया की निगरानी करेंगे।
एमडी से नियुक्तियों का अधिकार छिना
जेकेपीसीसी की कार्यप्रणाली को बेहतर बनाने के लिए एमडी से नियुक्तियों संबंधी अधिकार छिन लिए गए हैं। प्रशासनिक सचिव को बोर्ड का उपाध्यक्ष बनाया गया है। चेयरमैन को भेजा जाने वाला सभी प्रस्ताव एमडी स्तर से उपाध्यक्ष को अनिवार्य रूप से भेजा जाएगा। इसके साथ ही लागत निर्धारण प्रक्रिया में सुधार लाने का सुझाव दिया गया है। यह भी पाया गया कि एक प्रोजेक्ट से दूसरे प्रोजेक्ट में फंड का डायवर्जन किया गया है। इसके मद्देनजर प्रोजेक्ट मैनेजमेंट सिस्टम को मजबूत बनाने के लिए कदम उठाए जाएंगे।