वन्य जीव संरक्षण और ईको टूरिज्म के लिए महत्वाकांक्षी कदम माने जा रहे जम्मू चिड़ियाघर प्रोजेक्ट की राह में वित्तीय चुनौती सामने आ गई है।
राज्य में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के वजूद में आने के बाद से चिड़ियाघर का प्रस्ताव विचाराधीन था। चिड़ियाघर पर लगभग अस्सी करोड़ रुपये खर्च होने हैं जबकि अकेले तारबंदी के लिए ही विभाग को 2.86 करोड़ की राशि चाहिए।
साढ़े तीन दशक बाद प्रोजेक्ट के प्रस्ताव को सेंट्रल जू अथारिटी से मंजूरी मिली तो अब रियासत की माली हालत आड़े आ रही है। लगभग अस्सी करोड़ के प्रोजेक्ट के लिए पैसा कहां से लाया जाए, इस पर मंथन किया जा रहा है।
विभाग के प्रधान सचिव आरके गुप्ता कहते हैं कि प्रोजेक्ट पर अस्सी करोड़ की भारी भरकम राशि खर्च होनी है। प्रोजेक्ट से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विचार किया जा रहा है।
क्रियान्वयन की प्रक्रिया को अंजाम देने के लिए दस साल का समय निर्धारित किया गया है। पैसा उपलब्ध होने पर ही प्रोजेक्ट आगे बढ़ सकेगा। फिलहाल ऐसी कोई केंद्रीय योजना नहीं है, जिसमें विशेष रूप से चिड़ियाघर के लिए पैसा मिलता हो।
उल्लेखनीय है कि राज्य में आधुनिक सुविधाओं से लैस चिड़ियाघर का मास्टर प्लान बनाने की कवायद वर्ष 2013 में शुरू की गई।
हालांकि, वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1981 के बनने पर वन्य जीव अभ्यारण्य और वन्य जीव संरक्षित क्षेत्र बनाने के साथ ही चिड़ियाघर बनाने का प्रस्ताव भी रखा गया। दशकों बाद भी वन्यजीव विविधता को बढ़ावा देने के लिए जरूरी चिड़ियाघर का सपना पूरा नहीं हो पाया है।