एनीमिया के बढ़ते मामलों को देखते हुए केंद्र सरकार ने साल 2018 में देश में पोषण अभियान के तहत एनीमिया मुक्त भारत अभियान की भी शुरुआत की थी ताकि वर्ष 2022 तक हर साल तीन फीसदी तक एनीमिया के प्रसार को कम किया जा सके।
इसके तहत बच्चों को भी आयरन की गोलियां देना, पेट में कीड़े मारने की दवा देना, एनीमिया पीड़ित पुरुषों और महिलाओं को पोषण संबंधी आहार की जानकारी देना जैसे कई कदम शामिल हैं। फिलहाल एनीमिया मुक्त भारत अभियान के तहत हर साल तीन फीसदी तक एनीमिया के प्रसार को रोकने का लक्ष्य तय किया है, मगर नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे की हालिया रिपोर्ट के अनुसार ज्यादातर राज्यों में पांच साल तक के बच्चों में ही एनीमिया के मामले काफी बड़े हैं।
जम्मू संभाग
जिला 19-20 सर्वे 2015-16 सर्वे
जम्मू 68.4 33.7
कठुआ 67.0 41.6
किश्तवाड़ 88.5 65.3
पुंछ 54.3 51.5
राजोरी 76.4 52.0
रामबन 62.0 51.6
रियासी 69.7 63.5
सांबा 69.0 45.9
उधमपुर 70.4 64.0
डोडा 80.7 56.3
कश्मीर संभाग
जिला 19-20 सर्वे 2015-16 सर्वे
अनंतनाग 79.2 41.1
बडगाम 85.0 71.3
बांदीपोरा 75.1 58.9
बारामुला 70.4 63.6
गांदरबल 89.8 52.7
कुलगाम 77.7 59.7
कुपवाड़ा 78.8 75.2
पुलवामा 67.4 53.7
शोपियां 57.1 58.4
श्रीनगर 77.0 51.4
एनीमिया का प्रमुख कारण शरीर में आयरन की कमी होना है। आयरन की कमी से रेड ब्लड सेल का निर्माण नहीं हो पाता है, जिससे शरीर में थकान अथवा दूसरे प्रकार की समस्याएं सामने आती हैं। एनीमिया आज देश के लिए चिंताजनक स्थिति है। जम्मू-कश्मीर में बच्चों में एनीमिया के मामलों का बढ़ते जाना गंभीर स्थिति है। -डॉ. रोमेश गुप्ता, पूर्व अधीक्षक, जीएमसी जम्मू।