राजोरी। जिले की मांग पर कालाकोट में लगातार सातवें दिन भी बंद व धरने-प्रदर्शन का सिलसिला जारी रहा। रविवार को कालाकोट को जिला नहीं बनाने से नाराज बड़ी संख्या में लोगों ने गिरफ्तारी दी। इसमें कालाकोट व आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में महिलाओं व ग्रामीण भी शामिल रहे।
जिले की मांग पर रविवार को कालाकोट में बड़ी संख्या में पुलिस थाने पहुंचे और पुलिस को गिरफ्तारी दी। कालाकोट ज्वाइंट एक्शन कमेटी के बैनर तले प्रदर्शनकारियों ने कालाकोट पुलिस थाने के बाहर जमकर नारेबाजी की व सरकार के खिलाफ कड़ा रोष प्रकट किया।
इस दौरान लोगों ने सरकार पर कालाकोट के साथ भेदभाव करने का अरोप लगाते हुए बताया कि सरकार उनको मूर्ख बना रही है। पिछले एक हफ्ते से लोग बाजार बंद कर धरने-प्रदर्शन पर हैं। हर रोज करोड़ों रुपये का नुकसान हो रहा है, लेकिन सरकार के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही है।
गिरफ्तारी देने वालों में बड़ी संख्या महिलाओं की भी रही। इस दौरान खुद को पुलिस के हवाले करने वाले आंदोलनकारियों ने सरकार को कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि यदि अब भी सरकार की नींद नहीं खुली तो वह लोग उग्र रुप धारण करेंगे व सरकार को बहुत महंगा पड़ेगा।
‘कालाकोट के लोगों को कुछ लोग कर रहे गुमराह’
कालाकोट की जनता को कुछ लोग गुमराह कर माहौल को खराब करने का षड्यंत्र रच रहे हैं। राज्य की गठबंधन सरकार ने कालाकोट को स्वतंत्र एडीसी दिया है व उस एडीसी को कोटरंका के साथ कोई लेना-देना नहीं होगा। यह कहना है भाजपा की कालाकोट इकाई का।
भाजपा के कालाकोट ब्लाक अध्यक्ष विनोद कुमार व मंडल प्रधान सरदारी लाल ने साफ किया कि कोटरंका के एडीसी को कालाकोट का अतिरिक्त लेकिन स्वतंत्र कार्यभार मिला है। कोटरंका के एडीसी ही महीने में 15 दिन कालाकोट में बैठेंगे।
उन 15 दिनों में एडीसी का कोटरंका के साथ कोई लेना-देना नहीं होगा। उन 15 दिनों में एडीसी मात्र कालाकोट के लोगों के लिए काम करेंगे। अगले 15 दिन कालाकोट के लोगों को इंतजार करना पड़ेगा, लेकिन उन्हें अपने कामकाज के लिए कोटरंका जाने की कोई आवश्यकता नहीं होगी।