जम्मू जिला में डेंगू के सात नए पाजिटिव मामले सामने आए हैं। इसके साथ संभाग में अब तक चालीस लोग डेंगू से पीड़ित हो चुके हैं। विभिन्न चिकित्सा केंद्रों से 366 संदिग्ध मरीजों के खून के सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं। नए पाजिटिव मामलों के आने के बाद संभाग के सभी जिलों में डेंगू से निपटने के लिए सभी जरूरी एहतियात बरतने के निर्देश जारी किए गए हैं।
स्वास्थ्य निदेशक जम्मू डा. गुरजीत सिंह सूदन के अनुसार डेंगू को हालात नियंत्रण में हैं। कुछ लंबित सैंपलों की रिपोर्ट पाजिटिव आई है, लेकिन सभी मामलों में पीड़ित को उचित इलाज दिया गया है। मच्छरों के खिलाफ विशेष अभियान छेड़ा गया है।
डेंगू के पाजिटिव मामलों में अब तक जिला जम्मू सबसे आगे रहा है। इसके बाद जिला कठुआ में अधिक मामले आए हैं। हालांकि पारा गिरने से डेंगू की आशंका कम हो रही है, लेकिन पड़ोसी राज्यों में डेंगू का डंक बढ़ने से अभी मच्छरों को लेकर खतरा बना हुआ है। नए पाजिटिव मामलों के आने के बाद संदिग्ध मरीजों पर नजर रखने को कहा गया है।
पाजिटिव मामलों में अधिकांश विद्यार्थी शामिल
डेंगू से प्रभावित
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जम्मू संभाग के जिला कठुआ, सांबा, जम्मू, उधमपुर, रामबन, किश्तवाड़, राजोरी, रियासी सहित अन्य जिले डेंगू से प्रभावित रहे हैं। विभाग के अनुसार पाजिटिव मामलों में अधिकांश लोग बाहर से पीड़ित होकर यहां पहुंचे हैं। इनमें बड़ी संख्या में विद्यार्थी शामिल हैं।
हालांकि राहत यह है कि अभी तक डेंगू से राज्य में कोई मौत नहीं हुई है। वर्ष 2013 में डेंगू के करीब चार सौ पाजिटिव मामले सामने आए थे। उस समय हालत यह हो गई थी कि आम लोगों में डेंगू की दहशत को कम करने के लिए सरकार को अक्तूबर 2013 में निजी लैबों में डेंगू बुखार की जांच के लिए रेपिड टेस्ट (एनएस1) पर प्रतिबंध लगाना पड़ा था।
एलिजा राइडर टेस्ट (1 जीएम) में ही डेंगू के पाजिटिव होने की पुष्टि होती है। रेपिड टेस्ट में अन्य बुखार से डेंगू पाजिटिव आ जाता है।