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युवाओं में बढ़ रहा डोगरी भाषा को लेकर रुझान, यूनिवर्सिटी में कोर्स करने के लिए बढ़ी छात्रों की संख्या

Wed, 10 Apr 2019 01:47 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
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सांकेतिक तस्वीर
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अपने अस्तित्व के लिए जद्दोजहद कर रही डोगरी भाषा का दिन बहुरने लगा है। युवाओं में इस भाषा के प्रति रुझान बढ़ता दिख रहा है। इस अंदाजा डोगरी विभाग में लगातार बढ़ते छात्रों की संख्या से लगाया जा सकता है। इसकी एक बड़ी वजह यह भी है कि डोगरी में रोजगार के अवसर भी बढ़ रहे हैं।
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तीन साल में जम्मू विश्वविद्यालय के डोगरी विभाग में दाखिले लेने में छात्र ज्यादा रुझान दिखा रहे हैं। 2016 में 24 छात्रों के साथ बैच शुरू किया था जो साल 2017 में 35 तक पहुंच गया। साल 2018 में 34 छात्रों के साथ बैच शुरू हुआ था। इनके अलावा डोगरी विभाग में करीब 30 स्कालर डोगरी में रिसर्च यानी पीएचडी कर रहे हैं। डोगरी की अहमियत को समझते हुए इस भाषा को 8वीं अनुसूची में डाला गया है। हर कॉलेज व स्कूल में डोगरी को ऐच्छिक विषय के तौर पर रखा गया है।

'डोगरी हमारी अपनी भाषा है। पहले छात्र इसमें आना नहीं चाहते थे। क्योंकि इसमें उनको अपना भविष्य नजर नहीं आता था। लेकिन डोगरी में 49 पोस्ट निकलने के बाद बहुत से छात्र इस विषय की अहमियत समझने लगे हैं।'- प्रो. सुषमा शर्मा (एचओडी डोगरी विभाग, जेयू)

 

'डोगरी भाषा में आजकल छात्रों का रुझान बढ़ता जा रहा है, क्योंकि सरकार ने डोगरी के लिए सरकारी नौकरियों के अवसर देने शुरू किए हैं। लिहाजा छात्रों को इस विषय को पढ़ने के बाद अपना भविष्य उज्ज्वल नजर आ रहा है।'- प्रो. शिवदेव सिंह मन्हास (डोगरी विभाग, जेयू)

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'पहले डोगरी भाषा में ज्यादा स्कोप नहीं था, इसलिए छात्र अपनी भाषा होने के बावजूद डोगरी को छोड़कर अन्य विषय पढ़ने लगते थे। पर अब वे डोगरी को बाकी विषयों जैसा जरूरी समझ रहे हैं।'- डॉ. पद्मदेव सिंह (डोगरी विभाग, जेयू)


'हमारे राज्य में सारे स्कूल अंग्रेजी मीडियम हैं। अगर वे ही डोगरी भाषा का प्रचार नहीं करेंगे तो हमारी भाषा के बारे में छोटे बच्चों को पता कैसे चलेगा? हमें अपनी भाषा को बचाने के लिए सख्त कदम उठाने होंगे।-चंदन सिंह (छात्र, डोगरी विभाग, जेयूू)


'लोगों को अपनी भाषा बोलने में शर्म महसूस होती है। अगर हम डोगरे ही अपनी भाषा को नहीं बचाएंगे तो आने वाली पीढ़ी को इसके बारे में पता नहीं चल पाएगा। हमें हर स्तर पर भाषा का प्रचार करना चाहिए।'-श्रुति खजूरिया (छात्रा, डोगरी विभाग, जेयू)

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