'पहले डोगरी भाषा में ज्यादा स्कोप नहीं था, इसलिए छात्र अपनी भाषा होने के बावजूद डोगरी को छोड़कर अन्य विषय पढ़ने लगते थे। पर अब वे डोगरी को बाकी विषयों जैसा जरूरी समझ रहे हैं।'- डॉ. पद्मदेव सिंह (डोगरी विभाग, जेयू)
'हमारे राज्य में सारे स्कूल अंग्रेजी मीडियम हैं। अगर वे ही डोगरी भाषा का प्रचार नहीं करेंगे तो हमारी भाषा के बारे में छोटे बच्चों को पता कैसे चलेगा? हमें अपनी भाषा को बचाने के लिए सख्त कदम उठाने होंगे।-चंदन सिंह (छात्र, डोगरी विभाग, जेयूू)
'लोगों को अपनी भाषा बोलने में शर्म महसूस होती है। अगर हम डोगरे ही अपनी भाषा को नहीं बचाएंगे तो आने वाली पीढ़ी को इसके बारे में पता नहीं चल पाएगा। हमें हर स्तर पर भाषा का प्रचार करना चाहिए।'-श्रुति खजूरिया (छात्रा, डोगरी विभाग, जेयू)