जम्मू की बेटी संगीता सिंधी बहल का जज्बा किसी के लिए भी आगे बढ़ने की प्रेरणा हो सकता है। 53 साल की उम्र में माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा फहराकर उन्होंने साबित किया कि जुनून के आगे उम्र कोई मायने नहीं रखती। संगीता के सिर पर माउंट एवरेस्ट फतह करने वाली देश की उम्रदराज एवरेस्ट का ताज है। बकौल संगीता मन में कुछ करने की चाह हो तो कोई मुश्किलें रोड़ा नहीं बन सकतीं।
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Sangeeta Sindhi Bahl
- फोटो : फाइल
संगीता का सफर आसान कतई नहीं था। इससे पहले बीते साल भी उन्होंने अपना लक्ष्य हासिल करने की कोशिश की थी, लेकिन उन्हें गंभीर चोट आई। इसके बावजूद उन्होंने जज्बे को जिंदा रखा और आखिरकार इस साल मई में वह 29035 फीट ऊंची माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा फहराने में कामयाब रहीं।
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47 की उम्र में बढ़ाए माउंटेनियरिंग की ओर कदम
47 की उम्र में संगीता ने माउंटेनियरिंग की तरफ कदम बढ़ाना शुरू किया। बकौल संगीता जब वह माउंट एवरेस्ट के टॉप पर पहुंचीं तो उन्हें महसूस हुआ कि दुनिया बहुत सुंदर है। इस बीच वह भूल गईं कि ऊंचाई तक पहुंचने के लिए उन्होंने कितनी चुनौतियों का सामना किया। अलबत्ता, एवरेस्ट फतह करने जैसे मुश्किल लक्ष्य के लिए वह जुनून के साथ ही बेहतर ट्रेनिंग को भी अहमियत देती हैं।
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लाइफ स्टाइल बदलें, कुछ नया करने की कोशिश करें
सभी महिलाओं के लिए संगीता की सलाह है कि ‘आई कैन डू इट’ का जज्बा रखें। लाइफ स्टाइल बदलें और कुछ नया करने की कोशिश करें। बकौल संगीता उनमें यह ऊर्जा 20 साल की उम्र में भी नहीं थी। उन्होंने यह भी कहा कि नाकामयाबी से विश्वास न खोएं।
यही ऊर्जा आगे बढ़ने की प्रेरणा देगी। उनके पति एक बड़े कारोबारी हैं और बेटा देहरादून स्कूल में शिक्षा ग्रहण कर रहा है। खुद कारोबार कर रहीं संगीता इस वक्त गुड़गांव (हरियाणा) में रह रही हैं।