कबाड़ बनीं किताबों की दुर्गंध से लाइब्रेरियन बीमार
लुधियाना से करवा रहीं सांस की बीमारी का इलाज, 2005 में आए भूकंप के बाद बारिश में बर्बाद हो गईं सैकड़ों किताबें
अमर उजाला ब्यूरो
पुंछ। पुंछ के ऐतिहासिक किले में कभी जिला लाइब्रेरी काफी व्यवस्थित हुआ करती थी। 8 अक्तूबर 2005 को आए भूकंप में किले की पूरी इमारत क्षतिग्रस्त होने और फिर बारिश में भीगने से लाइब्रेरी की सैकड़ों किताबें कबाड़ में तब्दील हो गईं। आज हालत यह है कि कबाड़ बनीं किताबों के ढेर से इतनी दुर्गंध आती रहती है कि पुस्तकालय की लाइब्रेरियन को सांस की बीमारी हो गई है, जिसका वे लुधियाना से इलाज करवा रही हैं।
लाइब्रेरी के पाठक नीरज कुमार, सुनील कुमार, अफरोज अहमद आदि ने बताया कि जिला लाइब्रेरी एक ही हाल में चल रही है। इसी में पुस्तकालय और रीडिंग रूम भी है। लाइब्रेरी के गेट पर ही पुरानी एवं बेकार हो चुकीं पुस्तकों के ढेर लगे हैं। इसकी दुर्गंध से पाठकों के लिए लाइब्रेरी में बैठ कर पढ़ना मुश्किल हो जाता है। इसके कारण ही लाइब्रेरियन को सांस की बीमारी हो गई, जिससे वे हर समय मास्क लगाकर ड्यूटी देती हैं। नियमित रूप से लाइब्रेरी में आने वाले पाठकों को भी सांस की बीमारी का शिकार होने की चिंता सताती रहती है।
कबाड़ बन चुकीं पुरानी किताबाें के कारण ही मैं पांच साल से सांस की बीमारी से पीड़ित हूं। इसका मैं लुधियाना में उपचार करवा रही हूं। मैंने कई बार उच्च अधिकारियों से इन किताबों को डिस्पोज आफ करवाने का आग्रह किया, लेकिन कुछ नहीं किया गया। पिछले डीसी साहब ने इन किताबों से उठने वाली दुर्गंध का अहसास किया और उन्हें नष्ट कराने के लिए एक रिपोर्ट तैयार करने के लिए पांच जिला अधिकारियों की कमेटी गठित की थी। कमेटी के सदस्यों ने एक बार यहां का दौरा कर मामले की जांच भी की, लेकिन उसके बाद फिर सब कुछ ठंडा हो गया।
-सतवंत कौर, लाइब्रेरियन, जिला पुस्तकालय