पांच सौ और एक हजार रुपये के पुराने नोट बंद होने से दूसरे दिन भी अफरातफरी रही। वीरवार को बैंक खुलने के बावजूद कुछ ही लोगों को दो हजार और पांच सौ के नए नोट मिले, जबकि ज्यादातर लोग निराश लौटे। एक मोटे अनुमान के मुताबिक करीब पांच सौ करोड़ का व्यापार दूसरे दिन भी प्रभावित रहा।
चैंबर आफ कामर्स एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष राकेश गुप्ता के अनुसार व्यापारी वर्ग को नुकसान हो रहा है। पांच सौ और एक हजार का नोट बंद होने का सबसे बुरा असर ट्रेडिंग पर देखा जा रहा है। उम्मीद जताई कि कुछ दिनों में व्यापार पटरी पर आ जाएगा और लोगों की परेशानियां भी खत्म हो जाएंगी।
रेेहड़ी-फड़ी वालों के लिए दूसरा दिन भी मंदा रहा। पांच सौ और एक हजार के नोट लेकर पहुंचे ग्राहकों को लौटना पड़ा। वेअर हाउस मेें दूसरे दिन भी जरूरी सामान उधार लिया गया। कहीं-कहीं क्रेेडिट कार्ड का उपयोग किया गया। मेटाडोर और बसों में भी भीड़ कम रही।
मेडिकल शाप वालों ने पांच सौ का नोट लिया, लेकिन, वह भी उनसे ही जिनका बिल पांच सौ रुपये के करीब बना। जिन दुकानों में अक्सर भीड़ रहती थी, वो खाली नजर आईं। पेट्रोल पंप पर भी पांच सौ और एक हजार रुपये का ही तेल डाला गया। दूसरे दिन भी व्यापारियों को घाटा सहना पड़ा।