मुफ्ती सरकार के पहले बजट में किसान क्रेडिट कार्ड पर लिए गए ऋण में 50 फीसदी माफ करने की घोषणा महज एक छलावा साबित हुई है। किसानों का कहना है कि सरकार ने इस घोषणा के नाम पर मजाक किया है। बजट पेश हुए दो महीने हो चुके हैं, लेकिन घोषणा पर कोई अमल नहीं हो सका। किसानों ने इस पर कड़ा एतराज जताते हुए सरकार को जल्द ही इस पर अमल करने की मांग की।
किसान संगठनों ने साफ कर दिया कि यदि ऐसा नहीं तो सड़कों पर उतर आएंगे। राज्य उद्यमिता किसान विकास एसोसिएशन के प्रधान कुलभूषण खजुरिया ने कहा कि सरकार की घोषणा से किसानों ने राहत ली थी। दो फसलों का नुकसान झेलने के बाद लगा था कि किसानों को मदद मिलेगी, लेकिन सरकार की घोषणा मात्र एक छलावा ही साबित हुआ। घोषणा होने के बाद किसानों ने किस्तें देना बंद कर दी, लेकिन अब बैंकों से किस्तें देने का फरमान आ रहा है।
किसान संघ के प्रधान तेजिंदर सिंह वजीर का कहना है कि किसानों की दो फसलें बरबाद हुई हैं। इससे किसानों की कमर टूट चुकी है। ऐसे में अब तक किसान क्रेडिट कार्ड पर लोन माफ नहीं होना किसानों के लिए और दुखदायी है। सरकार को चाहिए कि जल्द ही इसे लेकर एसआरओ जारी करे। राइस ग्रोवर्स एसोसिएशन के प्रधान देव राज चौधरी का कहना है कि यदि सरकार ने जल्द ही इसे लेकर एसआरओ जारी नहीं किया तो किसानों को मजबूरन सड़कों पर उतरना पड़ेगा।