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चली-चली रे पतंग मेरी चली रे

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कठुआ। जिले में वसंत पंचमी का पर्व पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। वसंत ऋतु के स्वागत की कड़ी में लोगों ने सुबह मंदिरों में जाकर पूजा-अर्चना की। युवाओं ने दिनभर पतंगबाजी कर ऋतु के आगमन की खुशियां मनाई। आलम यह था कि पूरा शहर पतंगों से भरा रहा। कोई पतंग उड़ाने के लिए दौड़ लगा रहा था तो कोई कटी हुई पतंग को लूटने के लिए। बच्चों से लेकर बड़े और बुजुर्ग भी पतंगबाजी का शौक पूरा करते दिखे।
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रविवार की सुबह धूप खिलने के साथ ही शहर में घरों की छतों पर युवाओं की टोलियां पतंगबाजी में मशगूल हो गई। रविवार का दिन और ऐसे में स्कूलों व कालेजों में छुट्टी। संडे हालीडे ने वसंत पंचमी पर पतंग उड़ाने के मजे को दोगुना कर दिया। अधिकतर युवाओं ने पतंगबाजी का आनंद लेने के लिए अपने अपने दोस्तों के साथ एक छत पर ही इकट्ठे होकर पतंग उड़ाई। शहर का शायद ही कोई ऐसा कोना रहा होगा, जहां आसमान में रंग-बिरंगी पतंगें न दिखाई देतीं हों। हर पतंगबाज दूसरे की पतंग को काटने की फिराक में देखा गया। पर्व के स्वागत को लेकर युवाओं व बच्चों में जहां खासा उत्साह देखा गया वहीं, कुछ बड़े-बुजुर्ग भी पतंगबाजी का आनंद लेने से पीछे नहीं रहे। जब भी कोई पतंग कटती तो वातावरण चल गेया ईओ...वो काटा... आदि आवाजों से गूंज उठता। कुछ युवाओं ने तो पतंगबाजी का मजा दुगना करने के लिए डीजे व ढोल का भी प्रबंध कर रखा था। उधर, एक ओर जहां अधिकतर युवा पतंग उड़ाने का लुत्फ उठा रहे थे वहीं, कुछ बच्चों व युवाओं को कटी हुई पतंगें लूटते हुए भी देखा गया।
बजता रहा डीजे, उड़ती रही पतंग
वसंत ऋतु के स्वागत के लिए हर कोई अपने अंदाज में दिखा। युवाओं ने न केवल पतंग लूटी बल्कि डीजे की धुन पर पतंगबाजी का आनंद लिया। शहर के वार्ड दो, पारलीवंड इलाके, सावन चक इलाके की लगभग हर छत पर डीजे और अपने हिसाब से म्यूजिक सिस्टम लगाकर पतंगबाजी की गई। युवाओं ने पतंगबाजी के साथ डांस भी किया और पकवान आदि भी खाए।
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स्टेडियम से उड़ाई गई सबसे बड़ी पतंग
वसंत पंचमी पर पतंगबाजी का शौक रखने वालों का अपना अलग अंदाज होता है। कोई पतंग उड़ाता है और कोई मदद करता है। शहर के कुछ युवा ऐसे भी हैं जो हर साल शहर की सबसे बड़ी पतंग उड़ाते हैं। पूरा दिन पहले पतंग खुद तैयार करते हैं और उसके बाद उसे उड़ाते भी है। इस बार भी इन युवाओं ने 12 बाय 10 फुट लंबी चौड़ी पतंग उड़ाई। इसके लिए पतंग को जिला स्पोर्ट्स स्टेडियम लाया गया और फिर उसे दूर से हवा दी गई। इसके बाद पतंग आसमान में हिलोरें मारती हुई उड़ चली। जैसे-जैसे पतंग ऊपर चढ़ रही थी, वैसे-वैसे युवा गई ओए... कहकर मस्ती कर रहे थे। करीब आधा घंटा पतंग उड़ाने के बाद उसे उतार लिया गया।
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