जम्मू। इस सीजन संभाग में डेंगू के अब तक 71 पाजिटिव मामले सामने आ चुके हैं। इसमें केवल जम्मू जिले में 41 मामले पाजिटिव आए हैं। हालांकि राहत यह है कि अभी तक कोई मौत नहीं हुई है। जबकि 40 से अधिक खून के सैंपलों की रिपोर्ट आना बाकी है। विशेषज्ञों को अनुसार अक्तूबर माह के अंत तक डेंगू के मामले बढ़ सकते हैं।
सूत्रों के अनुसार पाजिटिव मामलों में दूसरे राज्यों में बसे जम्मू-कश्मीर के 12 लोग शामिल हैं। इसमें संबंधित राज्य प्रशासनों की ओर से स्वास्थ्य विभाग जम्मू को पाजिटिव मामलों के बारे में सूचित किया गया है।
तापमान के 30-35 डिग्री के बीच रहने पर डेंगू मच्छर लारवा का उत्पादन बढ़ता है। संभाग के कठुआ, उधमपुर, जम्मू, राजोरी आदि जिले डेंगू से प्रभावित रहे हैं। जम्मू शहर की बात करें तो ट्रांसपोर्ट यार्ड, एसआरटीसी यार्ड, वेयर हाउस, तालाब तिल्लो का कुछ क्षेत्र आदि इलाके ऐसे हैं, जहां टायरों आदि में पानी रुके होने के कारण मच्छरों का तादाद ज्यादा है, जिससे लोग ज्यादा पीड़ित होते हैं। वर्ष 2013 में रिकार्ड 1838 मामले डेंगू के पाजिटिव जम्मू संभाग में आए थे। इसमें 698 मलेरिया के पाजिटिव मामले भी शामिल थे। इनमें कई पीड़ितों की जान चली गई थी।
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एक साल तक सक्रिय रहता है लारवा
डेंगू के लिए जिम्मेदार एलबोपिक्टिस और एडिस एजिप्टी नामक मादा मच्छर का लारवा (अंडा) एक साल तक खराब नहीं होता है। यह साफ पानी में पैदा होने वाला मच्छर 16-40 डिग्री तक के तापमान में नुकसान कर सकता है। यह मच्छर सेकेंड में काटकर निकल जाता है। डेंगू के मच्छर के माथे पर तिलक की तरह सफेद रंग होता है। पैरों में भी सफेद और काले रंग का मिश्रण होता है। यह अमूमन सुबह दस बजे से पहले और शाम तीन बजे के बाद ज्यादा हमला करता है। यह कमरों के बाहरी क्षेत्रों में छिपा रहता है। मानव शरीर को सूंघने की इसकी काफी शक्ति होती है। मलेरिया के लिए एनोफिली मादा नामक मच्छर जिम्मेदार होती है।
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कैसे करें बचाव
1. कूलर, गमलों, टूटे बर्तनों, टायरों में पानी अधिक देर जमा न रहने दें
2. घर में मच्छरों के खात्मे के लिए सभी उपाय अपनाएं
3. बंद नालियां, निर्माण स्थल, कवर न रहने वाले टैंक आदि पर विशेष ध्यान दें
4. शरीर को ढककर रखने वाले परिधान पहनें
5. बच्चों में डेंगू के प्रति जागरूकता बढ़ाएं