बीते दिनों जम्मू-कश्मीर में आई भयानक तबाही ने जहां लाखों घर तबाह कर दिए तो कुछ घर ऐसे भी रहे जहां किलकारियां गूंजी। बाढ़ के तांडव के दौरान रियासत के कश्मीर संभाग में करीब साढ़े तीन हजार बच्चों ने जन्म लिया है।
इनमें से अधिकतर शिशुओं का जन्म सेना के अस्पतालों में हुआ है, जबकि अन्य का जन्म रियासत के सरकारी अस्पतालों में हुआ है। साढ़े तीन हजार शिशुओं में से करीब 2300 का जन्म सामान्य डिलीवरी से हुआ है तो अन्य का सिजेरियन ऑपरेशन से।
कश्मीर में चार-पांच सितंबर की रात को बाढ़ ने विकराल रूप धारण किया था जिसके बाद इन शिशुओं का जन्म हुआ है। जिन अस्पतालों में शिशुओं का जन्म हुआ है यह अस्पताल बाढ़ के दौरान भी किसी तरह संचालित किए जा रहे थे।
बाढ़ में करीब छह लाख मरीजों का इलाज
एक सरकारी प्रवकता के अनुसार संभाग के कई अस्पताल बाढ़ के दौरान भी चल रहे थे और इन अस्पतालों में बाढ़ के दौरान करीब पौने छह लाख (5,77,595) मरीजों को ओपीडी में देखा गया है। इन मरीजों में से करीब 34,600 मरीजों को अस्पतालों में भर्ती किया गया, 1,435 मरीजों का ऑपरेशन या सर्जरी की गई।
करीब 1.3 लाख मरीजों के सैंपल लैट टेस्ट के लिए लिए गए। बाढ़ के दौरान सेना और राज्य प्रशासन की तरफ से 145 मेडिकल कैंप भी लगाए जिनमें से 62 कैंप श्रीनगर में लगाए गए हैं। सेना और प्रशासन की तरफ से इन सभी अस्पतालों और कैंपों में लगातार दवाईयों की सप्लाई की जा रही है ताकि मरीजों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
शुरू हुआ सभी बड़े अस्पताल
सरकारी प्रवक्ता के अनुसार सौ करोड़ के नुकसान के बाद भी बाढ़ पीड़ितों की सुविधा के लिए मुफ्त मेडिकल कैंप लगाया गया है। इस कैंप में डायबिटीज, हायपरटेंशन और इस तरह की दूसरी बीमारियों से जूझ रहे मरीजों का इलाज किया जा रहा है।
सोमवार से श्रीनगर के अधिकतर अस्पतालों को शुरू किया जा चुका है। बारजुला का बोन एंड ज्वाइंट अस्पताल और जीबी पंत अस्पताल भी शुरू किया जा चुका है। अधिकतर बड़े अस्पताल शुरू होने के बाद रियासत के लोगों ने राहत की सांस ली है।