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कश्मीर में 34 राजनीतिक बंदियों को संतूर होटल से किया जाएगा शिफ्ट, 90 दिन में आया 2.65 करोड़ का बिल

Sun, 03 Nov 2019 07:46 PM IST
Pranjal Dixit न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
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लाल चौक, श्रीनगर (फाइल) - फोटो : बासित जरगर
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डल झील के किनारे स्थित मशहूर संतूर होटल में रखे गए 34 राजनीति बंदियों को शीघ्र ही वहां से शिफ्ट कर किसी नई जगह पर ले जाया जाएगा। प्रशासन का कहना है कि वहां सर्दियों के मौसम में उचित ताप बनाए रखने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। इसलिए नए परिसर की तलाश शुरू कर दी गई है।

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इस होटल में नेशनल कांफ्रेंस, पीडीपी, पीपुल्स कांफ्रेंस के नेताओं के अलावा प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता नजरबंद हैं। इन बंदियों के साथ इनकी सुरक्षा में तैनात जवानों के स्वास्थ्य का भी सर्दियों के मौसम ने इम्तिहान लेना शुरू कर दिया है। मालूम हो कि पांच अगस्त को केंद्र सरकार द्वारा अनुच्छेद 370 की समाप्ति के साथ जम्मू कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित करने की घोषणा के साथ ही। 

राजनीतिक नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं को तत्कालीन राज्यपाल प्रशासन ने इस होटल में नजरबंद कर दिया था। ये सभी उसी समय से वहां रखे गए हैं। इसमें पीपुलिस कांफ्रेस के सज्जाद लोन, नेशनल कॉंफ्रेंस के अली मोहम्मद सागर, पीडीपी के नईम अख्तर और पूर्व आईएएस अधिकारी शाह फैसल शामिल हैं। 

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होटल ने दिया 2.65 करोड़ का बिल

इस बीच भारतीय पर्यटन विकास निगम के स्वामित्व वाले होटल संतूर ने गृह विभाग को 90 दिनों की अवधि का 2.65 करोड़ का बिल भेज दिया है। यह बिल होटल में रखे गए राजनीतिक बंदियों के लिए दिया गया है। इस बीच प्रशासन ने होटल के बिल को मानने से इनकार कर दिया है। प्रशासन का दावा है कि होटल को पांच अगस्त को एक सहायक जेल में तब्दील कर दिया गया था। अत: इसका भुगतान सरकारी दर से किया जाएगा। अधिकारियों ने बताया कि प्रशासन द्वारा मंजूर की गई दरों के अनुसार, प्रतिदिन लगभग 800 रुपये का खर्च आएगा जबकि होटल इसके लिए 5000 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से वसूलता है।

नए परिसर के लिए जोरदार तलाश शुरू की गई
सर्दियों मे घाटी में परिस्थितियां थोड़ कठिन हो जाती हैं। श्रीनगर में तापमान हिमांक बिंदु से नीचे चला जाता है। उधर पांच नवंबर से दरबार जम्मू में काम करने लगेगा। इस बीच अधिकारियों ने बताया कि इन बंदियों की अलग-अलग स्थानों पर शिफ्टिंग के लिए जल्द ही कुछ उपाय किए जाएंगे। शहर के मध्य में स्थित रेजिडेंसी हॉस्टल एक विकस्प हो सकता था परंतु उसमें पूर्व विधायकों व नव निर्वाचित पार्षदों का कब्जा है। इसलिए अब राज्य सरकार द्वारा संचालित या निजी होटल की तलाश शुरू कर दी गई है। कैंट एरिया में स्थित उच्च सुरक्षा वाले एक निजी होटल के साथ बातचीत चल रही है। 
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