इस बीच भारतीय पर्यटन विकास निगम के स्वामित्व वाले होटल संतूर ने गृह विभाग को 90 दिनों की अवधि का 2.65 करोड़ का बिल भेज दिया है। यह बिल होटल में रखे गए राजनीतिक बंदियों के लिए दिया गया है। इस बीच प्रशासन ने होटल के बिल को मानने से इनकार कर दिया है। प्रशासन का दावा है कि होटल को पांच अगस्त को एक सहायक जेल में तब्दील कर दिया गया था। अत: इसका भुगतान सरकारी दर से किया जाएगा। अधिकारियों ने बताया कि प्रशासन द्वारा मंजूर की गई दरों के अनुसार, प्रतिदिन लगभग 800 रुपये का खर्च आएगा जबकि होटल इसके लिए 5000 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से वसूलता है।
नए परिसर के लिए जोरदार तलाश शुरू की गई
सर्दियों मे घाटी में परिस्थितियां थोड़ कठिन हो जाती हैं। श्रीनगर में तापमान हिमांक बिंदु से नीचे चला जाता है। उधर पांच नवंबर से दरबार जम्मू में काम करने लगेगा। इस बीच अधिकारियों ने बताया कि इन बंदियों की अलग-अलग स्थानों पर शिफ्टिंग के लिए जल्द ही कुछ उपाय किए जाएंगे। शहर के मध्य में स्थित रेजिडेंसी हॉस्टल एक विकस्प हो सकता था परंतु उसमें पूर्व विधायकों व नव निर्वाचित पार्षदों का कब्जा है। इसलिए अब राज्य सरकार द्वारा संचालित या निजी होटल की तलाश शुरू कर दी गई है। कैंट एरिया में स्थित उच्च सुरक्षा वाले एक निजी होटल के साथ बातचीत चल रही है।