जम्मू। स्वास्थ्य विभाग में डाक्टरों की कमी बरकरार है। खासतौर दूरवर्ती और ग्रामीण क्षेत्रों में त्वचा, सर्जन, स्त्री, न्यूरो, नेफरोलाजी, मनोचिकित्सकों की कमी बनी हुई है। जम्मू संभाग के दस जिलों में करीब 2106 सृजित डाक्टरों के पदों पर 457 सौ खाली पड़े हुए हैं। हालांकि एनएचएम के तहत कांट्रैक्चुअल डाक्टरों की सेवाएं ली जा रही हैं। इस कारण मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
पीएससी की ओर से हाल ही में राज्य में 921 डाक्टरों (मेडिकल आफिसर) की नियुक्ति की गई थी। इसमें जम्मू संभाग में 542 डाक्टरों में से सिर्फ 288 ने ही अपनी ड्यूटी पर ज्वाइन किया है। विभाग में पीजी के लिए सौ से अधिक डाक्टर दूसरे राज्यों और राज्य के चिकित्सा केंद्रों में कार्यरत हैं।
सूत्रों के अनुसार स्वास्थ्य विभाग की ओर से संबंधित भर्ती एजेंसियों को मेडिकल आफिसर (डाक्टर) और नान गजटेड कर्मियों के पद रेफर किए गए थे। हाल ही में फास्ट ट्रैक स्तर पर नौ सौ से अधिक मेडिकल आफिसरों की नियुक्ति की गई थी, लेकिन अभी तक सभी डाक्टरों ने ज्वाइन नहीं किया है। हर माह कर्मचारियों के साथ डाक्टर सेवानिवृत्त हो रहे हैं। इससे डाक्टरों की कमी और बढ़ रही है। सरकार का बाहरी राज्यों से अपने विशेषज्ञ डाक्टरों को वापस लाने का प्रयास विफल रहा है। देश विदेश से स्पेशलिटी करके पहुंच रहे अधिकांश डाक्टर दूसरे राज्यों का रुख कर रहे हैं। इसका बड़ा कारण वेतन में अंतर और दूसरे राज्यों के मुकाबले यहां सेवानिवृत्ति आयु कम होना है। खासकर सुपर स्पेशलाइजेशन करके आ रहे डाक्टर उचित सुविधाओं के लिए बाहर जाने को तवज्जो दे रहे हैं।
कहां कितने पद खाली
मौजूदा समय में डोडा जिले में 223 पदों में से 41 पद खाली पड़े हुए हैं। इसी तरह जम्मू जिला में सृजित 511 पदों में से 12, कठुआ में 278 पदों में से 72, किश्तवाड़ में 108 पदों में से 18, पुंछ में 212 पदों में से 66, राजोरी जिले में 251 पदों में से 87, रामबन में 132 पदों में से 30, सांबा में 134 पदों में से 15, रियासी में 113 पदों में से 50, उधमपुर में 201 पदों में से 63 पद रिक्त हैं।
वेटिंग लिस्ट में डाक्टरों को प्राथमिकता मिलेगी
जिन मेडिकल आफिसरों ने ज्वाइन नहीं किया है, उन्हें बर्खास्त कर वेटिंग लिस्ट के मेडिकल आफिसरों को प्राथमिकता दी जाएगी। डाक्टरों के पद भरने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।
डॉ. समीर मट्टू, स्वास्थ्य निदेशक, जम्मू