फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सिविल सर्विसेज में चयनित आमिर के गांव में ईद सा जश्न

विज्ञापन
विज्ञापन
मुनीश शर्मा
विज्ञापन

पुंछ।
यूपीएससी की परीक्षा में रियासत के अन्य होनहारों की तरह पुंछ जिले की मेंढर तहसील के एक नौजवान का चयन हुआ है। मेंढर के बेहद पिछड़े इलाके और बक्करवालों के गांव सलवा से आमिर बशीर का सिविल सर्विसेज में चयन होने के बाद वहां ईद जैसा माहौल है।
शनिवार की सुबह जैसे ही आमिर बशीर पुत्र मोहम्मद बशीर के गांव में यूपीएससी की परीक्षा पास करने की सूचना मिलने लगी, उसके परिवार के अलावा अन्य गांव के लोगों ने भी जश्न मनाना शुरू कर दिया। आज तक जिस गांव में भूले से भी किसी अधिकारी के पांव नहीं पड़ते थे, वहां के एक नौजवान द्वारा यूपीएससी की परीक्षा पास करने से हर ग्रामीण खुश नजर आ रहा था। गांव में मिठाइयां बांटी गईं और विजय जुलूस निकाले गए, जैसे आमिर बार्डर पर कोई मोर्चा फतह कर आया हो। उसके घर पर बधाई देने वालों का तांता लगने लगा, जो देर शाम तक जारी रहा। हर शख्स यही कर रहा था कि आमिर ने बक्करवालों के इस गांव का नाम रोशन कर दिया।
विज्ञापन

आमिर के चाचा-चाची और दादी की खुशी का कोई ठिकाना नहीं था। उनका कहना था कि आमिर जब नौवीं में पढ़ता था, तो उसके पिता का स्वर्गवास हो गया था। मां ने बड़ी मुश्किलों से आमिर को पढ़ाया। जब जिले के अन्य पिछड़े क्षेत्रों की तरह यहां भी आतंकवाद का बोलबाला हो गया और लोगों का घरों से बाहर निकलना मुश्किल हो गया, तो लोग अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेज पाते थे। गांव का कोई भी आदमी अकेला दरवाजे से बाहर कदम नहीं रखता था कि कहीं आतंकी उसे अपने साथ न ले जाएं। उस वक्त आमिर की मां उसे लेकर जम्मू चली गई। आमिर ने आज अपनी जिंदगी में जो मुकाम हासिल किया, वह उसकी मां की मेहनत का नतीजा है। गांव निवासियों ने बताया कि सलवा गांव मेंढर तहसील आज भी सबसे पिछड़ा गांव हैं। आज तक इस गांव तक जाने के लिए पक्की सड़क नहीं बन पाई है। गांव का स्कूल जिसका 1984 में मिडिल से दर्जा बढ़ा कर हाई स्कूल किया गया, उसे आज तक हायर सेकेंडरी स्कूल नहीं बनाया गया है। इस इलाके में 1999 से 2004 तक आतंकवाद का बोलबाला रहा। गांव के बुजुर्गों का कहना है कि हम बक्करवाल बिरादरी के लोगों को बड़ी खुशी है कि हमारी बिरादरी का अमिर बशीर आईएएस पास कर गया है। उनकी इच्छा है कि वह डीसी बन कर पुंछ में आए और इस पिछड़े इलाके का विकास करवाए।
विज्ञापन


दादी ने कहा, काश मेरा बेटा जिंदा होता, तो उसे अपने बच्चे पर नाज होता
आमिर की दादी बहुत भावुक नजर आईं। आमिर की कामयाबी पर उन्होंने कहा कि काश मेरा बेटा भी जिंदा होता, तो उसे अपने बेटे की सफलता पर नाज होता। बूढ़ी दादी को ठीक से दिखाई नहीं पड़ता है, लेकिन वे अपने पोते की सफलता पर मारे खुशी के नाच रही थीं। रह-रह कर पोते का फोटो चूमते हुए अपने पुत्र बशीर को याद कर वे रोने लगतीं। पोते की सफलता के लिए बार-बार वे खुदा का शुक्रिया अदा कर रही थीं। वे कह रही थीं कि अब जल्दी से आमिर मेरे पास आ जाए, तो मैं उसका माथा चूम कर उसकी बलाएं ले लूं। मुझ बदनसीब को इतनी खुशी कहां मिलने वाली थी। भरी जवानी में पति गुजर गए। उसके बाद बड़ा बेटा बशीर भी छोटे से आमिर को छोड़ कर खुदा के घर चला गया। सारी उम्र गरीबी, गम और मजबूरियों में बीती। ऐसे में खुदा ने जो खुशी दी है, उससे बढ़ कर मेरे लिए और कुछ नहीं हो सकता है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें