कश्मीर युवकों को आतंकी संगठनों के बहकावे में नहीं आने से रोकने के लिए रियासत सरकार द्वारा शुरू की गई काउंसलिंग बेअसर साबित हो रही है।
हिजबुल मुजाहिदीन, जैश-ए मोहम्मद और लश्कर-ए तैयबा ने शिक्षित कश्मीरी युवकों की भर्ती के लिए मुहिम तेज कर दी है। आतंकी बुरहान वानी की मौत के बाद दक्षिणी कश्मीर से सबसे अधिक 88 कश्मीर युवक आतंकी संगठनों में शामिल हुए हैं।
पाकिस्तान से घुसपैठ कर आने वाले आतंकियों के अलावा स्थानीय आतंकियों ने सुरक्षा बलों के लिए नई चुनौतियां खड़ीं की हैं। कश्मीर की दो लोकसभा सीटों पर उपचुनाव और उसके ठीक प्रस्तावित पंचायत चुनाव के मद्देनजर सुरक्षा बलों ने स्थानीय आतंकियों के सफाए के लिए अभियान तेज कर दिया है।
गृह मंत्रालय के दस्तावेज भी 245 स्थानीय युवकों की आतंकी संगठनों में भर्ती की पुष्टि करते हैं। दस्तावेजों के अनुसार छह साल में 245 कश्मीर युवक आतंकी संगठनों में भर्ती हुए हैं जबकि सुरक्षा एजेंसियों के सूत्रों के मुताबिक आतंकी बुरहान वानी की जुलाई में मौत के बाद 200 से अधिक स्थानीय युवक आतंकी संगठनों में शामिल हुए हैं। सरकार इस संख्या को 88 बताती है। सरकारी दस्तावेज के अनुसार पिछले सात साल में यह सबसे बड़ी भर्ती है।