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सुपर स्पेशलिटी में किडनी प्रत्यारोपण की कवायद तेज

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जम्मू। किडनी प्रत्यारोपण (ट्रांसप्लांट) के लिए अब जम्मू संभाग के मरीजों को दूसरे राज्यों का रुख नहीं करना पड़ेगा। एम्स की तर्ज पर रेशम घर कालोनी में स्थापित सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में किडनी प्रत्यारोपण की कवायद तेज की गई है। इसके लिए फैकल्टी सदस्यों की कमेटी गठित की गई है। कमेटी ढांचे के साथ अन्य जरूरी संसाधनों और उपकरणों की रिपोर्ट तैयार कर रही है। शनिवार को कमेटी के सदस्यों ने नेफरोलाजी सहित संबंधित यूनिटों का निरीक्षण करने के साथ प्रत्यारोपण प्रोजेक्ट पर बैठक करके चर्चा की।
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सुपर स्पेशलिटी के नेफरोलाजी यूनिट में हर साल दो हजार से ज्यादा किडनी के नए मरीज पहुंच रहे हैं। इसमें 25-40 आयु वर्ग के किडनी क्रोनिक फेलियर मरीजों की तादाद बढ़ी है। ऐसे मरीजों को डायलेसिस के सहारे कुछ समय रखा जाता है, लेकिन स्थायी चिकित्सा के लिए किडनी प्रत्यारोपण की जरूरत पड़ती है। वर्ष 2013 से दिसंबर 2017 तक नेफरोलाजी यूनिट में 18,429 हेमोडायलेसिस किए जा चुके हैं। इसके अलावा 109 सीएपीडी, 19740 ओपीडी हुई है। नेफरोलाजी विभाग के एचओडी डॉ. एसके बाली ने बताया कि किडनी प्रत्यारोपण की सुविधा के लिए कमेटी रिपोर्ट तैयार कर रही है। कमेटी में जीएमसी की माइक्रोबायोलाजी विभाग की एचओडी डा. बेला महाजन को चेयरमैन बनाया गया है। इसके अलावा डा. एसके बाली को सदस्य सचिन और सदस्यों में रेडियोलाजी विभाग के प्रो. नरेंद्र शर्मा, बायो केमिस्ट्री से डा. एएस भाटिया, पैथोलोजी विभाग से डा. सुभाष भारद्वाज, यूरोलाजी विभाग से डा. इलियास शर्मा शामिल हैं। किडनी प्रत्यारोपण के लिए प्रमुख रूप से नेफरोलाजी के साथ यूरोलाजी विभाग काम करेंगे। इनके साथ स्पोर्टिंग विभागों में ब्लड एंड ट्रांसफ्यूजन मेडिसन विभाग, पैथोलोजी, बायो केमिस्ट्री, माइक्रोबायोलाजी आदि विभाग काम करेंगे। रिपोर्ट में प्राथमिक स्तर पर ब्लड बैंक के लिए जगह की तलाश, चौबीस घंटे लैबोरेटरी चलाना, सर्जिकल, नेफरोलाजी आईसीयू को अपग्रेड करना, सर्जिकल थियेटर को अपग्रेड करना आदि शामिल है। रिपोर्ट तैयार करके शीघ्र सरकार को भेजी जा रही है। श्रीनगर के शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल एंड साइंस (स्किम), सोरा अस्पताल में सरकार किडनी प्रत्यारोपण पर सब्सिडी दे रही है। लेकिन सुपर स्पेशलिटी जम्मू के नेफरोलाजी विभाग में वर्ष 2013 से कोई नई डायलेसिस मशीन नहीं खरीदी गई है।
ब्लड बैंक की चुनौती ज्यादा
सुपर स्पेशलिटी अस्पताल जम्मू में मौजूदा ब्लड स्टोरेज की सुविधा उपलब्ध है। जबकि, यहां यूरोलाजी, सीटीवीएस, कार्डियोलाजी में सर्जरी के साथ नेफरोलाजी में नियमित डायलेसिस हो रहे हैं। इन सभी यूनिटों में मरीजों को ब्लड की जरूरत होगी। ब्लड बैंक के लिए जगह की तलाश के साथ लाइसेंस सहित अन्य औपचारिकताएं पूरी करना चुनौती रहेगा।
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