लोकतंत्र के पर्व का जबर्दस्त जश्न रहा। अलगाववादियों के बहिष्कार को दरकिनार कर घाटी में लोगों ने भारी मतदान किया, जो उनके लिए सबक है। लेकिन आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो घाटी की तुलना में जम्मू में जमकर वोट पड़े।
दूसरे चरण में घाटी के आतंकवाद प्रभावित जिले कुपवाड़ा तथा कुलगाम के नौ विधानसभा सीटों पर मतदान था। कुलगाम जिले के चार गांवों में चुनाव बहिष्कार भी रहा। जम्मू संभाग में रियासी तथा उधमपुर जिले की छह सीटों पर मतदान में 20 फीसदी तक की बढ़ोत्तरी हुई है।
राजनीति विज्ञानियों का कहना है कि चुनाव बहिष्कार के आह्वान के बाद भी घाटी में जमकर वोट पड़े। यह अलगाववादियों के मुंह पर तमाचा है। अहम बात यह है कि दो-तीन सीटों को छोड़कर घाटी में सभी जगह 60 प्रतिशत से अधिक मत पड़े। घाटी में लंगेट विधानसभा सीट पर मतदाताओं का उत्साह काफी अधिक रहा है।
यहां पिछले चुनाव से दस प्रतिशत और नूराबाद में तीन फीसदी अधिक वोट पड़े। उधर, जम्मू संभाग के रियासी जिले की गुलाबगढ़ सीट पर तीन प्रतिशत, रियासी में सात, गुल अरनास में चार, उधमपुर में 11, चिनैनी में 20, रामनगर में 11 प्रतिशत अधिक मत पड़े।
उत्साह इस कदर था कि लोग सुबह मतदान शुरू होने से पहले ही लाइन में लग गए थे। रियासी में गवर्नमेंट स्कूल भागा में वोट के लिए पहुंचे सुखदेव का कहना था कि मतदान से पहले जलपान का बड़े जोरशोर से प्रचार किया गया था। इसी का अनुसरण कर सबसे पहले उन्होंने वोट डालने का फैसला किया था।