सीएजी ने पावर डेवलपमेंट डिपार्टमेंट को कटघरे में खड़ा किया है। उसने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि पिछले चार साल में 2000 करोड़ रुपये एरियर की वसूली नहीं हो पाई है।
विधानसभा में पेश सीएजी की रिपोर्ट में कहा गया है कि विभाग की ओर से कोई प्रभावी उपाय न किए जाने की वजह से इलेक्ट्रिसिटी चार्ज का एरियर अप्रैल 2011 में 1220.18 करोड़ रुपये से बढ़कर मार्च 2015 तक 2092.41 करोड़ रुपये हो गया। इस एरियर में 1015 करोड़ रुपये राज्य सरकार के विभागों (कारपोरेशन तथा निकायों को छोड़कर) के हैं।
इन्हें मार्च 2013 में कैबिनेट के फैसले के आधार पर माफ कर दिया गया। शेष 1076.78 करोड़ रुपये की राशि मार्च 2015 तक वसूल की जानी थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि बजट में अनुमानित राशि से काफी कम राजस्व वसूली की गई है। 2010-11 से 2014-15 तक वसूली 19 से 34 फीसदी तक कम हुई है।
रिपोर्ट में पीडीडी की इस बात के लिए आलोचना की गई है कि वह 2010 की रिपोर्ट में वर्णित संस्तुतियों को लागू करने में विफल रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि पांच साल में पीडीडी को इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी से न तो छूट दी गई है और न ही 2010-15 के बीच पावर की बिक्री पर इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी चार्ज किया गया है।
इससे 1194.13 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है। विभाग की ओर से 259.13 करोड़ रुपये इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी की वसूली के लिए कोई प्रभावी कदम भी नहीं उठाए गए। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि चेकिंग न किए जाने की वजह से और 1.25 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। मार्च 2010 तक 12.66 लाख उपभोक्ता मार्च 2010 तक थे।