जम्मू। लोकसभा चुनाव की घोषणा हो चुकी है। इसके लिए जम्मू कश्मीर पुलिस कितना तैयार है, इसका जवाब आपको शहर के थानों की हालत पता चलने पर मिल जाएगा। बेशक चुनाव के लिए अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती होगी, लेकिन चुनाव से पहले शहर की सामान्य सुरक्षा की जिम्मेदारी शहर में स्थापित पुलिस थानों की है। चौंकाने वाले तथ्य यह हैं कि शहर के थानों में पुलिस कर्मियों की भारी किल्लत है, जो रूटीन में गश्त के लिए तैनात होते हैं।
शहर की हद में नवाबाद, बस स्टैंड, पक्का डंगा, पीर मिट्ठा, जानीपुर, बख्शी नगर, गांधी नगर, सतवारी, गंग्याल, छन्नी हिम्मत, त्रिकुटा नगर, बाग ए बाहु मुख्य रूप से आते हैं। यह सभी थाने शहर को कवर करते हैं, लेकिन इनमें पुलिस कर्मियों की संख्या लगभग 60 फीसदी से कम है।
तीन बार ग्रेनेड हमले का शिकार होने वाले बस स्टैंड की हालत चौंकाने वाली है। बस स्टैंड पुलिस थाने में 30 पुलिस कर्मियों की कमी है। नवाबाद पुलिस स्टेशन में 60 से 70 पुलिस कर्मियों की कमी है। इसी तरह शहर के सभी थानों में औसत 30 से 40 पुलिस कर्मियों की कमी है।
इतने पुलिसकर्मी नहीं कि चौबीस घंटे नजर रख सकें
पिछले दो सालों से शहर में आतंकी गतिविधियां काफी बढ़ गई हैं। थानों में इतनी नफरी नहीं कि शहर में 24 घंटे पैनी नजर रखी जा सके। झज्जर कोटली और फिर सुंजवां में आतंकी हमला हुआ, बस स्टैंड पर तीन बार ग्रेनेड हमला हुआ, गांधी नगर में आतंकी को ग्रेनेड के साथ पकड़ा गया, नगरोटा में भी आतंकी हमला हुआ... यह सब घटनाएं सुरक्षा में एक बड़ी चूक हैं। इस चूक के पीछे सबसे बड़े कारणों में पुलिस थानों के पास कर्मियों का टोटा होना भी शामिल है।
आधे से अधिक कैमरे बंद
पुलिस के सुरक्षा दावों की पोल सीसीटीवी कैमरे भी खोल देते हैं। पुलिस की तरफ से शहर में 40 से अधिक जगहों पर सीसीटीवी लगाए गए थे। इनमें से आधे से भी ज्यादा बंद पड़े हुए हैं। पुलिस को शहर में लोगों द्वारा लगाए गए सीसीटीवी कैमरों का ही सहारा है। सुरक्षा के दावे करने वाली पुलिस की अपनी तीसरी आंख ही बंद पड़ी हुई है।
जल्द पूरी करेंगे कमी
थानों की हालत बहुत खराब है। हर एक थाने में 30 से 40 पुलिस कर्मियों की कमी है। कब पूरा करेंगे इस कमी को। इन सवालों का अमर उजाला ने आईजी जम्मू एमके सिन्हा से जवाब मांगा तो उन्होंने कहा कि बहुत जल्द थानों में मैन पावर की कमी को पूरा किया जाएगा।
...तो इसलिए बस स्टैंड साफ्ट टारगेट
शहर के बस स्टैंड के दोनों प्रवेश गेट के बाहर हर समय पुलिस कर्मी तैनात नहीं रहते। न ही 24 घंटे बस स्टैंड के भीतर और इसके आसपास गश्त होती है। रघुनाथ बाजार का भी यही हाल है। पूरी तरह से गश्त न होने और कर्मियों का अभाव ही है कि आतंकी बार बार बस स्टैंड को निशाना बना रहे हैं। बस स्टैंड उनके लिए साफ्ट टारगेट बन चुका है।