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ऋतुराज के स्वागत में खिले फूल, डरा पाला

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कठुआ। कहावत है आए बसंत, पाला उड़ंत। ऋतुओं के राजा बसंत के आगमन पर इस समय प्रकृति अपना नए सिरे से शृंगार करने में लगी है। खेतों में सरसों, मटर और अन्य फसलों के साथ बगीचों और जंगलों में रंग-बिरंगे फूल ऋतुराज का स्वागत कर रहे हैं। दूसरी तरफ सर्दी का असर अब धीरे-धीरे कम होने के संकेत मिलने लगे हैं। पिछले दिनों पहाड़ों पर भारी बर्फबारी और मैदानों में मूसलाधार बारिश के बार पारा काफी नीचे चला गया था। अब बसंत ऋतु के आगमन से हर दिन सूरज देवता कृपा बरसा रहे हैं। ऐसे में सर्दी का असर भी कम होने लगा है। हालांकि रविवार को बादलों और सूर्यदेव के बीच सुबह लुकाछिपी का खेल फिर शुरू हो गया था, लेकिन मौसम विभाग ने अगले कुछ दिन मौसम साफ रहने की भविष्यवाणी की है। ऐसा अनुमान है कि यदि मौसम कुछ खराब होता भी है तो अब सर्दी के दिन लदने वाले हैं।
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बसंत के आते ही दिन के तापमान के साथ रात के तापमान में भी वृद्धि दर्ज की गई है। दिन में रविवार को सर्द हवाएं चलीं, लेकिन दिनभर सूर्य देव की कृपा के चलते लोगों को सर्दी का अहसास कम हुआ। ऊपरी इलाकों में सर्द हवाओं के कारण ठंड जारी है। मौसम विभाग के अनुसार शनिवार के मुकाबले रविरवार को दिन का तापमान 18 डिग्री रिकार्ड किया गया। इसी तरह से न्यूनतम तापमान ने भी शनिवार के मुकाबले दो डिग्री का उछाल लेकर 9 डिग्री सेल्सियस के स्तर को छू लिया। बहरहाल अगले चौबीस घंटों के भीतर भी आसमान साफ रहेगा और दिन में धूप खिलने के आसार है। उसके बाद आसमान में बादल छाने अथवा हल्की बूंदाबांदी के आसार जरूर बन रहे हैं। निचले मैदानी इलाकों में तापमान के उछाल का असर दिनचर्या पर पड़ने लगा है। दिन की अवधि लंबी हो रही है। अलबत्ता पर्वतीय इलाकों में मौसम सर्दी के अहसास को लगातार कायम रखे हुए है। खासकर बर्फबारी के बाद से पर्वतीय इलाकों में हल्की शीतलहर से तापमान पर असर पड़ा है।
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