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रात भर बरसते रहे गोले

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हीरानगर। शुक्रवार सुबह से दोपहर तक युद्धस्थल बने भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा के गांव में शुक्रवार की रात बारह बजे तक धमाके गूंजते रहे। मोर्टार के धमाकों और गोलियों की तड़तड़ाहट के बीच ग्रामीणों की नींद और चैन भी उड़ गए। शाम सात बजे के लगभग जैसे ही ग्रामीणों ने रात के खाने का इंतजाम शुरू किया फिर गोलाबारी शुरू हो गई। अफरा तफरी फैलते ही गांव अंधेरे में डूब गया। बच्चे भूखे प्यासे रातभर घरों में दुबके रहे।
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पाकिस्तानी गोलाबारी से हीरानगर सेक्टर के मनियारी गांव में सबसे अधिक नुकसान पहुंचा है। जहां कई घरों को नुकसान पहुंचने के साथ ही आधा दर्जन के लगभग मवेशी भी गोलाबारी का शिकार हुए हैं। रात भर पानसर, चोर गली, पहाड़पुर, पानसर, फकीरा पोस्ट, कडियाला, गुज्जरे चक, चक चंद्रा, चक चंगा, बोबिया, लौंडी समेत दर्जनों गांव में पाकिस्तान की ओर से गोलाबारी रुक-रुक कर रात बारह बजे तक जारी रही। इस दौरान लोग सलामती की दुआ मांगते रहे। सहमे ग्रामीणों ने बातचीत में बताया कि उन्हें भरोसा नहीं था कि सुबह का सूरज देख भी पाएंगे या नहीं। गांव की गलियों और घरों पर बर्बादी के निशान साफ देखे जा सकते थे। उन्होंने कहा कि पास में कहीं धमाका होते ही पूरा परिवार कांपने लगता था।
मनियारी निवासी देव राज ने बताया कि उनके घर की छत पर मोर्टार का गोला गिरा तो पूरा परिवार कांप गया। पूरा परिवार एक कमरे के कोने में छुप गया और पूरी रात वहीं पर गुजार दी। रातभर धमाकों की आवाज उनके कानों में गूंजती रही और वे यही सोचते रहे कि कब यह भयानक आवाज बंद हो। उन्हाेंने बताया कि पूरा गांव इसी तरह से घरों के एक कमरे में कैद रहा और अपने परिवार की सलामती की दुआ करता रहा। गोलाबारी से घरों की दीवारें और छत तो छलनी हुई हीं, कई घरों के शीशे तक चकनाचूर हो गए।
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ग्रामीणों को सता रही बच्चों के भविष्य की चिंता
हीरानगर। हर बार सीमावर्ती इलाकों में गोलाबारी होने के बाद ग्रामीण तो परेशान होते ही हैं, बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित होती है। प्रशासन द्वारा स्कूलों को एहतियातन बंद रखने के निर्देश के बाद शनिवार को भी सीमावर्ती इलाके से पांच किलोमीटर के दायरे के सभी सरकारी और निजी स्कूलों में ताले लटके रहे।
सीमावर्ती ग्रामीण प्रीतम कुमार, कमल कुमार, रघुवीर सिंह, प्रीतम सिंह ने बताया कि पाक की नापाक हरकतों ने उनके बच्चों का भविष्य अंधकारमय कर दिया है। इस बार तो पाक ने अचानक गोलाबारी करके बच्चों में और भी दहशत उत्पन्न कर दी है। कुछ दूसरों के घरों में और दुकानों में छुप कर जान बचाई। इससे बच्चों में यह भावना बन गई है कि पाकिस्तान देर सबेर कभी रिहायशी इलाकों को निशाना बना सकता है और कई बच्चे तो अब स्कूल जाने से भी कतराने लगे हैं। उन्होंने कहा कि देश के विकास के दावे किए जा रहे हैं लेकिन बच्चे पढ़ेंगे नहीं तो सीमावर्ती इलाके पिछड़ जाएंगे। जो लोग संपन्न हैं वो तो परिवार लेकर गांव से जा चुके हैं, लेकिन जमीनों और मवेशियों को छोड़कर बाकी लोग कहां जाएं।
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बार्डर पर सियासत हुई तेज, नेताओं का आना जाना शुरू
अमर उजाला ब्यूरो
हीरानगर।
सीमावर्ती लोगों के हलात का जायजा लेने दिनभर सियासी नेताओं का आना जाना लगा रहा। गोलाबारी थमने के बाद स्थानीय विधायक भी लेागों की सुध लेने पहुंचे। विधायक ने हीरानगर सेक्टर के विभिन्न इलाकों का दौरा कर लोगों को सुरक्षा और बंदोबस्त का भरोसा दिलाया। उधर, कांग्रेस नेता चौधरी बलबीर सिंह ने बोबिया, पान्सर, मनियारी में लोगों के हालात जाने। वहीं आईडीपी नेता आईडी खजूरिया ने पहाड़पुर व मन्यारी गुज्जर बस्ती के लोगों का हाल जाना। सभी नेताओं ने लोगों को आश्वासन दिया कि इस घड़ी में हर संभव मदद करेंगे और आपके साथ खडे़ रहेंगे। लोगों के नुकसान की भरपाई वे तो नहीं कर सकते, लेकिन नुकसान की जानकारी सरकार तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा ताकि उचित मुआवजा मिल सके। लोगों ने भी नेताओं को अपनी समस्याओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी, जिसमें मांग की कि उन्हें बंकर, सुरक्षित स्थलों पर रहने की जगह मिले।
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