श्रीनगर। मुख्य सचिव अटल डुल्लू ने सोमवार को जम्मू-कश्मीर में कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों की सुधार परियोजना (जेकेसीआईपी) के कार्यों की समीक्षा
करते हुए परियोजना की प्रगति, वार्षिक कार्य योजना, वित्तीय तंत्र और केंद्र शासित प्रदेश भर के किसानों की प्रतिस्पर्धात्मकता और जलवायु परिवर्तन के प्रति सहनशीलता बढ़ाने के भविष्य की रणनीतियों पर चर्चा की। परियोजना के डिज़ाइन की सराहना करते हुए अगले वित्तीय वर्ष के लिए निर्धारित सभी लक्ष्यों को पूरा करते हुए इसके प्रभावी क्रियान्वयन का आह्वान किया। इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए एक ऋण उत्पाद तैयार करने को कहा। मुख्य सचिव ने आवेदकों द्वारा प्रस्तुत आवेदनों को शीघ्र स्वीकृति प्रदान करने, प्रशिक्षकों-लाभार्थियों की क्षमता बढ़ाने और उनके उद्यमों को सफल बनाने के लिए प्रशिक्षण मॉड्यूल तैयार करने पर बल दिया। बैंक अधिकारियों से सेवा वितरण को सुव्यवस्थित करने और समन्वय बढ़ाने के लिए अपनी परिचालन प्रक्रियाओं को जेकेसीआईपी पोर्टल के साथ पूरी तरह से एकीकृत करने का आग्रह किया। दीर्घकालिक सफलता सुनिश्चित करने के लिए एक अनुकूलित ऋण उत्पाद तैयार करने को कहा।
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव शैलेंद्र कुमार ने बताया कि इस परियोजना में लगभग 217 मिलियन अमेरिकी डॉलर (1800 करोड़ रुपये) का कुल निवेश शामिल है। उन्होंने बताया कि इसे जम्मू-कश्मीर में उच्च मूल्य वाली विशिष्ट वस्तुओं के उत्पादन, मूल्य संवर्धन और विपणन में वृद्धि के माध्यम से किसानों की प्रतिस्पर्धात्मकता और जलवायु परिवर्तन के प्रति लचीलापन बढ़ाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। कृषि उत्पादन विभाग द्वारा आयोजित इस बैठक में कृषि उत्पादन विभाग के प्रमुख सचिव, एसकेयूएएसटी जम्मू के कुलपति जम्मू-कश्मीर बैंक के प्रबंध निदेशक, एचएडीपी के प्रबंध निदेशक समेत अन्य उच्च अधिकारी मौजूद रहे।
जम्मू और कश्मीर के तीन लाख परिवारों तक पहुंचने का है लक्ष्य
परियोजना के उद्देश्यों के बारे में बताया गया कि इसका लक्ष्य जम्मू (45 ब्लॉक) और कश्मीर (45 ब्लॉक) यानी दोनों संभागों के 90 ब्लॉकों में तीन लाख परिवारों (15 लाख व्यक्तियों) तक पहुंचना है। इसमें विशेष रूप से कमजोर समूहों पर ध्यान दिया जा रहा है जिनमें 141,000 महिलाएं (47%), 90,000 युवा (30%) और अन्य कमजोर समुदायों के 30,000 व्यक्ति (10%) शामिल हैं। 2025-26 के लिए वार्षिक कार्य योजना और बजट के संबंध में बताया गया कि यह 150.06 करोड़ रुपये है। प्रमुख आवंटनों में जलवायु-अनुकूल और बाज़ार-आधारित उत्पादन के लिए 110.33 करोड़ रुपये, कृषि-व्यवसाय पारिस्थितिकी तंत्र विकास के लिए 14.21 करोड़ रुपये और पशुपालकों तथा अन्य कमजोर समुदायों के समर्थन के लिए 15.90 करोड़ रुपये शामिल हैं।
एडब्ल्यूपीबी 2025-26 के लिए स्वीकृत 172 गतिविधियों में से 151 गतिविधियों के लिए कुल 138 करोड़ रुपये की खरीद योजना को आईएफएडी की मंजूरी मिल गई है। इसमें परामर्श सेवाएं, अनुदान और वस्तुएं शामिल हैं। 2025-26 के लिए, बीम्स पर 75 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। साथ ही वित्त विभाग द्वारा 15 जुलाई 2025 को 12.50 करोड़ रुपये की अतिरिक्त अग्रिम निकासी स्वीकृत की गई है।
अब तक 1240 किसानों का पंजीकरण हुआ
बैठक में बताया गया कि 19 जुलाई 2025 तक लगभग 1240 किसानों का पंजीकरण हो चुका है और 478 आवेदन प्राप्त हुए हैं जिनमें भेड़/ बकरी इकाई, सब्जी की खेती, जल प्रबंधन, संरक्षित खेती और सेब फसल प्रबंधन पर केंद्रित प्रमुख गतिविधियां शामिल हैं। इसके अलावा, यूटीएलबीसी के सहयोग से एक किसान-अनुकूल ऋण उत्पाद विकसित किया गया है जिसमें बिना किसी प्रसंस्करण शुल्क के 10% सीमांत ब्याज, दो वर्ष तक की स्थगन अवधि और आठ वर्ष तक की पुनर्भुगतान अवधि शामिल है। यह भी बताया गया कि ट्यूलिप, केसर, सेब और ऊन मूल्य श्रृंखला जैसे प्रमुख क्षेत्रों के लिए विभिन्न व्यावसायिक योजनाएं चल रही हैं। इसके अलावा इस परियोजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए मानव संसाधन को मजबूत करने के लिए विभागों में विभिन्न अधिकारी पदों के लिए साक्षात्कार निर्धारित किए गए हैं। व्यापक मानव संसाधन विकास पहलों को लागू किया जा रहा है। बता दें कि किसानों और हितधारकों के बीच जागरूकता बढ़ाने के लिए ग्रामीण ऋण कार्यशालाएं अगस्त में शुरू होंगी।