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बच्ची की मौत पर फूटा लोगों का गुस्सा, जम्मू-पठानकोट नेशनल हाईवे जाम कर किया प्रदर्शन

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- फोटो : Amar ujala
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कठुआ। हीरानगर सब डिविजन के रसाना गांव से आठ दिन से लापता आठ वर्षीय बच्ची का शव बुधवार को संदिग्ध परिस्थितियों में गांव के रिहायशी इलाके से कुछ दूरी पर मिला। इससे स्थिति तनावपूर्ण हो गई। मृतका के परिजनों ने जिला अस्पताल व छन्न मोरियां में जम्मू-पठानकोट नेशनल हाईवे जाम कर प्रदर्शन किया।
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लगभग दो घंटे तक हाईवे जाम कर पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए ग्रामीणों ने मामले में हीरानगर पुिलस द्वारा लापरवाही बरतने के गंभीर आरोप लगाए।उन्होंने रोष जताते हुए थाना प्रभारी और एक अन्य पुलिसकर्मियों पर लापरवाही के लिए कड़ी कार्रवाई किए जाने और मृतका के परिजनों को उचित मुआवजे की मांग की।

मौके पर पहुंचे एसडीएम हीरानगर सुरेश शर्मा, तहसीलदार गौरव शर्मा और एसडीपीओ बार्डर रघुवीर सिंह, एएसीपी कठुआ संजय परिहार, डीएसपी मुख्यालय एसएस संब्याल ने प्रदर्शनकारियों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन लोग हाईवे पर ही डटे रहे। एसडीएम के लिखित आश्वासन के बाद हाईवे पर यातायात बहाल हो सका।
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प्रशासन ने मृतका के परिजनों को रेडक्रास से राहत राशि जारी करने का भी भरोसा दिलाया है। इस दौरान दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लगी रहीं।उल्लेखनीय है कि आठ दिन पहले आठ वर्षीय एक बच्ची रहस्यमय परिस्थिति में लापता हो गई थी। परिजनों ने थाने में इस संबंध में थाने में शिकायत दी।

आरोप है कि पुलिस ने बच्ची की तलाश में अधिक गंभीरता नहीं दिखाई। बुधवार की सुबह हीरानगर के रसाना गांव के नजदीक बच्ची का शव मिलने से पूरे गांव में सनसनी फैल गई।
सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेते हुए पोस्टमार्टम के लिए कठुआ जिला अस्पताल पहुंचाया, जिसके बाद तीन डॉक्टरों के बोर्ड ने शव का पोस्टर्माटम कर उसे परिजनों के हवाले कर दिया।
 
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अपहरण कर दुष्कर्म का है आरोप

बच्ची की मौत से परिजन व ग्रामीण भड़क गए और उन्होंने पहले जिला अस्पताल में और उसके बाद छन्न मोरियां में हाईवे जाम कर पुलिस के खिलाफ नारेबाजी कर प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि बच्ची का अपहरण करने के बाद उससे दुष्कर्म किया गया है।

पुलिस यदि समय से कार्रवाई करती तो बच्ची की जान बचाई जा सकती थी। उन्होंने कहा कि हीरानगर थाना प्रभारी से ग्रामीण मिलने पहुंचे थे और जल्द पता लगाने की मांग भी की थी, लेकिन अधिकारी ने गैर जिम्मेदाराना तरीके से लोगों को सरकारी काम बताकर लौटा दिया।

वहीं थाने में तैनात एक अन्य पुलिसकर्मी जो रसाना गांव का ही रहने वाला था उसने भी लोगों को धमकाया।परिजनों ने आरोप लगाया कि बच्ची के शव पर मिले घाव से साफ है कि उसे मौत के घाट उतारने से पहले प्रताड़ित किया गया है। जबकि पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी रही।
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क्या कहते हैं एएसपी

मामले की संवेदशीलता को देखते हुए जिला पुलिस प्रमुख ने एक गजटेड अधिकारी की देखरेख में एसआईटी का गठन कर दिया है। जिस पुलिस कर्मचारी पर प्रदर्शनकारियों द्वारा आरोप लगाए गए हैं उसे लाइन हाजिर कर दिया जाएगा।

जांच में अगर उसकी कोई संलिप्ता पाई गई तो उस पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अभी पुलिस विभिन्न पहलुओं को ध्यान में रखते हुए मामले की छानबीन कर रही है। लोगों द्वारा बच्ची के साथ दुष्कर्म के आरोप की पुष्टि डाक्टरों की रिपोर्ट के बाद ही हो पाएगी। इस पूरे मामले में अगर किसी भी पुलिस अधिकारी या कर्मचारी द्वारा लापरवाही पाई गई तो उस पर भी विभागीय कार्रवाई होगी।
-संजय परिहार, एएसपी कठुआ
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