जम्मू। कश्मीर के कुलगाम में आतंकियों से मुठभेड़ में जम्मू का लाल शहीद हो गया। उसकी शहादत पर हर किसी की आंखें नम तो हैं, लेकिन गर्व से सीना चौड़ा है। अकेले लड़ना सीखो... यह शब्द शहीद डीएसपी अमन ठाकुर के फेसबुक अकाउंट की प्रोफाइल फोटो पर लिखे हैं। ये शब्द उनकी असल जिंदगी की पूरी कहानी बयां करते हैं। आतंकियों से मुठभेड़ को लीड करने वाले डीएसपी अमन ठाकुर ने आगे बढ़कर अकेले ही मोर्चा संभाला और शहीद हो गए।
अमन एक ऐसे अफसर थे, जिन्हें कार्यालय में बैठना पसंद नहीं था। हर समय फील्ड में ड्यूटी करना पसंद था। अपने सीनियर से कहते थे कि सर उन्हें बाहर भेजें। करीब डेढ़ साल पहले अमन को कुलगाम में पुलिस के आतंक विरोधी दल का नेतृत्व करने का जिम्मा दिया गया था। इससे पहले वह जम्मू में आईआरपी 10 बटालियन में थे।
जिंदादिली और सादगी का हर कोई कायल
2011 बैच के केपीएस अधिकारी अमन के बैचमेट रहे डीएसपी निखिल रसगोत्रा का कहना है कि अमन की जिंदादिली और सादगी का हर कोई कायल था। अमन को जहां भी जो भी काम मिला, उसने उतनी ही शिद्दत से किया। उसकी हमेशा कोशिश होती थी कि वह फील्ड में रहकर काम करे। आतंकियों से लड़ने के लिए हर दम तैयार था।
कहां तुम चले गए...
शहीद डीएसपी अमन ठाकुर मूल रूप से डोडा जिले के गोगला गांव के रहने वाले थे, लेकिन उनका परिवार अब जम्मू के नागबनी में शिफ्ट हो गया है। अमन अपनी पत्नी सरला ठाकुर के साथ जम्मू के रेशमघर कालोनी में किराये के मकान में रहते थे। उनका सात साल का एक बेटा आर्य विश्व प्रताप ठाकुर है। अमन के शहीद होने की खबर सुनते ही सरला की आंखों से आंसुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। सब उन्हें ढांढस बंधाते रहे, लेकिन आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे। वह बार-बार एक ही बात कहती रहीं कि तुम कहां चले गए... अभी 15 फरवरी को ही तो तुम घर आए थे।
सांत्वना देने पहुंचे जितेंद्र और सलाहकार विजय
रेशमघर कालोनी स्थित अमन ठाकुर के किराये के मकान पर उनकी पत्नी को सांत्वना देने वालों का हुजूम लग गया। खबर मिलते ही सबसे पहले जम्मू के डीआईजी विवेक गुप्ता, एसएसपी तेजिंदर सिंह, आईजी एमके सिन्हा, फिर राज्यपाल के सलाहकार के विजय कुमार और फिर केंद्रीय मंत्री डा जितेंद्र सिंह पहुंचे। अधिकारियों ने शहीद की पत्नी को सांत्वना दी।
कभी नहीं लगा कि वह डीएसपी हैं
अमन के मोहल्ले में रहने वाले लोगों ने कहा कि उन्हें कभी लगा ही नहीं कि उनके मोहल्ले में एक पुलिस अफसर रहता है। वह जब भी घर आते तो इस तरह से मोहल्ले के लोगों से बात करते, जैसे वह सामान्य इंसान हों। हर किसी से मिलजुलकर और प्यार से बात करते थे।
पाकिस्तान के खिलाफ नारेबाजी
जम्मू। अमन की शहादत की खबर सुनते ही सैकड़ों लोग उनके घर के बाहर जमा हो गए। यहां शहीद अमन अमर रहे, भारत माता की जय, पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे लगाए गए। पाकिस्तान के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और भड़ास निकाली। इसके बाद लोगों ने तिरंगा लेकर रैली भी निकाली। रेशमघर कालोनी से निकली रैली महेशपुरा चौक तक पहुंची और फिर वहां से वापस रेशमघर पहुंची। लोगों ने शहीद के घर पहुंचे केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह से कहा कि वह अब आरपार की लड़ाई चाहते हैं। वक्त आ गया है कि अब पाकिस्तान से सीधी लड़ाई हो। इस तरह से कब तक चलेगा। कब तक हर रोज किसी का घर उजड़ेगा। कई लोगों ने जम्मू को अलग राज्य बनाने की मांग भी की।