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खुले में शौच मुक्त के दावों की पोल खोल रहे बंद पड़े शौचालय

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उधमपुर/जिब। जिले के ग्रामीण इलाकों में बंद पड़े नवनिर्मित शौचालय जिले को खुले में शौच मुक्त करने के दावे की पोल खोल रहे हैं। प्रशासन ने ग्रामीण इलाकों में हर घर में शौचालय का निर्माण करवाया है। लेकिन कुछ घरों में पानी की सप्लाई न होने से ग्रामीण इन शौचालय का इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं। कई ग्रामीणों ने शौचालय को स्टोर के तौर पर इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है।
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वर्ष 2018 के शुरूआत में जिला प्रशासन ने स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के तहत जिले को खुले में शौच मुक्त करने को अभियान शुरू किया था। सितंबर 2018 तक जिले की 230 पंचायतों में 75 हजार के करीब शौचालय का निर्माण करवा कर जिले को खुले में शौच मुक्त घोषित कर दिया गया। इसको लेकर पूरे राज्य में जिला प्रशासन ने खूब वाहवाही भी बटोरी, लेकिन अब धीरे धीरे खुले में शौच मुक्त के दावे असलियत सामने आ रही है। इसमें कोई शक नहीं है कि प्रशासन ने 75 हजार के करीब शौचालय का निर्माण करवाया है, लेकिन शौचालय होने के बावजूद कई ग्रामीण आज भी खुले में ही शौच कर रहे हैं। इसका प्रमुख कारण में घरों में पानी के कनेक्शन न होना है। पानी के कनेक्शन न होने के कारण शौचालय में इस्तेमाल करने के लिए पानी नहीं है।
चक, पड़ानू, कल्लर, मांगरली, रसाना, शरतीबंली, खुंडुई, कालटा, गरनई व अन्य कई ग्रामीण इलाके ऐसे हैं, जहां ग्रामीणों ने आज तक शौचालय का इस्तेमाल नहीं किया है। शौचालय बनाने के बाद इन ग्रामीणों ने शौचालय के अंदर लकड़ी व अन्य किसी तरह का सामान रख दिया है। कुछ गांववासियों ने अपने मवेशी रखे हुए हैं। ग्रामीणों के अनुसार कई बार पानी के अभाव में शौचालय के इस्तेमाल न करने की परेशानी को ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारियों के सामने रखा है, लेकिन किसी ने कुछ नहीं किया है।
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शौचालय बनने के बाद किसी ने नहीं ली सुध
विजय शर्मा, संजय व अन्य ग्रामीणों ने बताया कि जब शौचालय नहीं बने थे तो हर सप्ताह ग्रामीण विकास विभाग का अधिकारी घर पहुंच कर शौचालय बनाने के लिए दबाव बनाता था। सबको शौचालय न बनाने पर राशन बंद करने की भी धमकी दी जाती थी, लेकिन जब शौचालय बन गए तो फिर किसी ने भी शौचालय की सुध नहीं ली है। किसी ने यह नहीं देखा कि शौचालय का इस्तेमाल करने के लिए पानी है कि नहीं।

शौचालय बनाने के बाद नहीं मिली राशि
ग्रामीणों ने बताया कि ग्रामीण विकास विभाग ने आश्वासन दिया था कि शौचालय बनान के बाद शौचालय बनाने के लिए निर्धारित की गई राशि जल्द सबके एकाउंट में जमा हो जाएगी, लेकिन आज कई ग्रामीणों को एक रुपया भी नहीं मिला है। कई ग्रामीणों ने कर्ज लेकर शौचालय का निर्माण किया था, लेकिन आज तक वह कर्ज नहीं चुका पाए हैं।

पानी की सप्लाई ग्रामीणों तक पहुंचाने के लिए दस योजनाएं जल्द पूरी होने वाली है। इन योजनाओं से हर घर को पानी मिलेगा और ग्रामीण शौचालय का भी इस्तेमाल कर सकेंगे। इसके अलावा ग्रामीणों को जागरूक कर बताया जाएगा कि शौचालय के इस्तेमाल में ज्यादा पानी की जरूरत नहीं है। पूरा प्रयास किया जा रहा है हर गांववासी शौचालय का इस्तेमाल करने लगे।
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रविंदर कुमार, डीसी
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