जम्मू। जम्मू-कश्मीर राज्य महिला आयोग (जेकेएसडब्ल्यूसी) बेजान हो चुका है। इसकी अध्यक्ष इस्तीफा दे चुकी हैं। केवल दो सदस्य नाम को हैं। ऐसे में केवल शिकायतें दर्ज की जा रही हैं, लेकिन कार्रवाई कोई नहीं हो पा रही। यहां तक कि त्रिकुटा नगर के एक प्ले स्कूल में बच्चियों के साथ हुए छेड़छाड़ के मसले पर भी आयोग अपनी भूमिका को अंजाम नहीं दे सका।
आयोग की अध्यक्ष नईमा महजूर गवर्नर रूल के बाद पूर्व सरकार की तरफ से हुई नियुक्तियों के खारिज होने के आदेश की जद में थीं, लिहाजा उन्होंने इस्तीफा सौंप दिया। नईमा महजूर कहती हैं कि वह कुछ भी करने की स्थिति में नहीं। आयोग के सचिव अशरफ अब्दुल्ला का भी एक दूसरे विभाग में स्थानांतरण हो चुका है, लेकिन उन्होंने अभी वहां ज्वाइन नहीं किया है। गुलजारा दाउदी और कविता सूरी इसकी सदस्य हैं। कविता सूरी कहती हैं कि अगर सचिव ने उन्हें बच्चियों वाले मामले में निर्देशित किया होता तो वह वहां जरूर जातीं। फिलहाल आयोग के किसी भी सदस्य ने बच्चियों या उनके परिवार से कोई बात नहीं की है। हकीकत यही है कि जिस महिला आयोग को महिलाओं से जुड़े मसलों पर कार्रवाई के लिए मजबूत होना चाहिए, वह मजबूर है।