श्रीनगर। चारों तरफ से बौखलाए आतंकवादी घटिया स्तर पर उतर आए हैं। बुधवार को हुए शोपियां इनकाउटर के बारे मूें पता चला है कि बुर्कानशीं औरत के बीच बुर्का पहने हिजबुल के आंतकी किसी बड़ी वारदात के लिए आ रहे थे। खुफिया इनपुट के आधार पर सेना के गश्ती दल ने उन्हें ललकारा। औरतों की भीड़ में शामिल आतंकियों ने बुर्का हटा कर फिल्मी अंदाज में फायरिंग शुरू कर दी। सेना ने जवाबी कार्रवाई की जिसमें दो आतंकी ढेर गए। कुछ फरार भी हो गए। इस घटना दो औरतें भी घायल हो गई थीं। शर्मनाक है कि आतंकियों ने महिलाओं को ह्यूमन शील्ड की तरह इस्तेमाल किया।
दक्षिणी कश्मीर के शोपियां जिले के चायगुंड में बुधवार सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ की असल कहानी सेना के 12 सेक्टर आरआर के कमांडर ब्रिगेडियर हरबीर सिंह ने गुरुवार को आपरेशन खत्म होने के बाद मीडिया से बयान की।
उन्होंने बताया पिछले कुछ दिनों से इनपुट्स थे कि गणतंत्र दिवस से पूर्व आतंकी किसी बड़ी वारदात को अंजाम दे सकते हैं। एक ग्रुप की मूवमेंट को भी पिछले 4-5 दिनों से ट्रैक किया जा रहा था। बुधवार शाम को उन्हें इनपुट मिले कि इलाके में आतंकी छुपे हुए हैं, जिसके चलते इलाके की घेराबंदी की गई और घरों में मौजूद स्थानीय लोगों को सुरक्षित स्थानों की ओर जाने को कहा गया। ब्रिगेडियर ने बताया कि इस दौरान देखा कि 8-10 बुर्के वाली महिलाओं का ग्रुप सेना के गश्ती दल की तरफ बढ़ा। इसमें दो आतंकी भी थे। वह इन महिलाओं को ह्यूमन शील्ड के रूप में इस्तेमाल कर रहे थे। जैसे ही जवानों को इस ग्रुप में आतंकियों के होने की भनक लगी तो उन्होंने आतंकियों को ललकारा। जिसके जवाब में आतंकियों ने उनपर फायरिंग शुरू कर दी।
जवानों ने महिलाओं की सुरक्षा को सुनिश्चित बनाते हुए हवा में फायरिंग की और इस दौरान आतंकी एक गौशाला में जा छुपे। तुरंत आतंकियों को घेरे में लिया गया और एक भीषण मुठभेड़ शुरू हुई जो करीब डेढ़ घंटे तक जारी रही। मुठभेड़ में दो हिज्ब के आतंकियों को मार गिराया। उन्होंने बताया कि उनके पास से एक इंसास राइफल और एक एके-47 राइफल बरामद हुई है। ब्रिगेडियर के अनुसार मारे गए आतंकियों की शिनाख्त गनावपुरा के रहने वाले फिरदौस लोन (16 सितंबर 2017 को आतंकी बना) और ओडू शोपियां के समीर अहमद वानी (सितंबर 2017 में आतंकी बना) के तौर पर हुई है। कमांडर ने यह भी बताया कि जिस प्रकार के इनपुट्स थे उससे अंदेशा लगाया जा रहा है कि यह आतंकी भी फिदायीन जैसे हमले को अंजाम देने की फिराक में थे। उन्होंने यह भी कहा कि पहली बार ऐसे देखने को मिला कि बुरका पहने आतंकी फरार होने की कोशिश कर रहा है। आतंकियों की इसी रणनीति के चलते फायरिंग के दौरान स्थानीय लोगों को भी नुकसान पहुंचा।