जम्मू-कश्मीर में बेरोजगारी देश की बेरोजगार दर से कहीं अधिक है। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडिया इकोनामी (सीएमआईई) की और से सितंबर 2020 तक जारी आंकड़ों में देश का बेरोजगारी दर 6.7 फीसदी है, जबकि जम्मू-कश्मीर में यह 16.2 है। देश में उत्तराखंड और त्रिपुरा के बाद जम्मू-कश्मीर सबसे अधिक बेरोजगारी दर वाला प्रदेश है। उत्तराखंड की बेरोजगारी दर 22.3, जबकि त्रिपुरा की 17.4 फीसदी है। प्रदेश सरकार शिक्षित युवाओं को रोजगार देने में विफल साबित हुई है। इसका बात प्रमाण सीएमआईई की आंकड़ा दे रहा है। रिपोर्ट युवाओं को रोजगार देने के नाम पर चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं की भी पोल भी खोल रही है।
प्रदेश में जम्मू-कश्मीर में युवाओं के लिए बेरोजगारी सबसे बड़ी समस्या है। शिक्षित होने के बावजूद भी रोजगार नहीं मिल रहा है। आलम यह कि प्रदेश में चतुर्थ श्रेणी के आठ हजार रिक्त पदों के लिए पांच लाख के करीब युवाओं ने आवेदन किया है। प्रदेश में शिक्षित बेरोजगार युवाओं की फौज में लगातार इजाफा हो रहा है।
युवाओं के पास रोजगार नहीं होने से वह नशे और आतंकवाद के रास्ते पर चल रहे है। वर्तमान में जम्मू-कश्मीर में सैन्य भर्ती युवाओं के लिए एक मात्र रोजगार का माध्यम हैं। कश्मीर घाटी में अशांति के माहौल का भी रोजगार पर असर पड़ा है। अनुच्छेद-370 हटने और कोरोना संक्रमण के कारण लॉकडाउन से लोगों का रोजगार छिन गया है।
अनियमितता के कारण रद्द हो रही परीक्षाएं
प्रदेश में विभिन्न विभागों द्वारा भर्ती प्रक्रिया चलाई जाती हैं, लेकिन परीक्षाओं में अनियमितता होने के कारण ज्यादातर परीक्षाएं रद्द हो जाती हैं। जैक बैंक, जेकेआरटीसी, सहित विभिन्न विभागों की भर्ती परीक्षाएं अनियमितता के कारण ही र्द्द हो गई है। अनियमितता के कारण भर्ती प्रक्रिया लंबी खिच जाती है, जिससे युवाओं को समय पर रोजगार नहीं मिल पाता है।