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जिला अदालत पहुंच कर सुलझा शव के अंतिम संस्कार का विवाद

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उधमपुर। शव के अंतिम संस्कार को लेकर चल रहा विवाद सोमवार को जिला अदालत में शांत हुआ। जिला अदालत में जज के सामने दोनों परिवार पेश हुए। दोनों परिवारों की सहमति के बाद व्यक्ति के शव को माता पिता के हवाले कर दिया गया और व्यक्ति की सारी संपति का अधिकारी पत्नी को दे दिया गया। विवाद सुलझने के बाद शाम करीब साढ़े चार बजे कड़ी सुरक्षा के बीच शव का अंतिम संस्कार देविका शमशान घाट पर कर दिया गया।
गौरतलब है कि कुछ दिन पहले कृषि विभाग के कर्मचारी की उपचार के दौरान मौत हो गई थी। मौत के बाद शव के अंतिम संस्कार को लेकर रविवार को जिला अस्पताल में विवाद पैदा हो गया था। मृतक सुभाष चंद्र ने माता पिता की मर्जी के खिलाफ दूसरे समुदाय की लड़की के साथ शादी की थी और शादी के बाद से ही सुभाष पत्नी के साथ अलग रह रहा था। जब सुभाष के परिवार को बेटे की मौत की सूचना मिली तो सभी जिला अस्पताल पहुंच गए थे और जब उनको यह पता चला था कि पत्नी अपने समुदाय के अनुसार पति के शव का अंतिम संस्कार करने जा रही है तो सभी भड़क गए थे। इसको लेकर सभी ने धार रोड को बंद कर प्रदर्शन भी किया था। पत्नी ने दावा किया था शादी के बाद उसके पति ने उसके समुदाय को अपना लिया है, इसलिए वह उसका अंतिम संस्कार अपने समुदाय के अनुसार करना चाहती है। हालांकि समुदाय को अपनाने का पत्नी कोई सबूत नहीं दे सकी।
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सोमवार को मामला कोर्ट में पहुंच गया। कोर्ट में दोनों परिवार मामले को सलुझाने के पक्ष में नजर आए। दोनों परिवारों ने आपस में बात की। पत्नी शव को मृतक के परिवार को सौंपने को तैयार हो गई, लेकिन पति की संपति पर पूरा हक जताया। इसको लेकर मृतक का परिवार भी तैयार हो गया, इसलिए दोनों परिवारों की आपसी सहमति के साथ मामला सुलझ गया। कोर्ट के निर्णय के बाद पुलिस ने औपचारिकताएं पूरी करने के बाद शव को परिवार को सौंप दिया। शाम को शव को अंतिम संस्कार के लिए देविका शमशान घाट ले जाया गया। शाम करीब साढ़े चार बजे शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया। शमशान घाट पर पुलिस ने सुरक्षा के कड़े प्रबंध कर रखे थे।
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दूसरे दिन भी छावनी में तब्दील रहा जिला अस्पताल
रविवार को विवाद पैदा होने के बाद रात को भी जिला अस्पताल छावनी में तब्दील रहा। पूरी रात अस्पताल में पुलिस व सीआरपीएफ के जवान तैयारी के साथ तैनात रहे। पुलिस किसी तरह की लापरवाही करने को तैयार नहीं थी। सोमवार को जब कोर्ट का निर्णय आने के बाद शव को परिवार को सौंपा जा रहा था तो उस समय सुरक्षा व्यवस्था को बढ़ा दिया गया था।
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