श्रीनगर। दक्षिणी कश्मीर के कुलगाम जिल ेके अशमुजी गांव निवासी शहीद लांस नायक नजीर अहमद वानी अपनी दिलेरी के लिए जाने जाते थे। शहीद होने से पूर्व भी वह कई महत्वपूर्ण ऑपरेशनों में भाग ले चुके थे। नजीर को दिलेरी के लिए दो बार सेना मेडल मिल चुका था। मरणोपरांत उन्हें सर्वोच्च सुरक्षा सम्मान अशोक चक्र मिला। आर्मी गुडविल स्कूल का नाम शहीद नजीर के नाम करने से पूर्व एक अन्य एजीएस को शहीद लेफ्टिनेंट उमर फयाज के नाम समर्पित किया जा चुका है।
ज्ञात रहे कि 25 नवंबर 2018 सेना की 34 राष्ट्रीय राइफल्स द्वारा सीआरपीएफ और पुलिस के साथ मिलकर शोपियां के बटगुंड इलाके के हिरपोरा गांव में आतंकियों के खिलाफ एक ऑपरेशन चलाया गया था। मुठभेड़ में गोली लग जाने के बाद घायल होने के बावजूद वे आतंकियों से लोहा लेते रहे। एक अधिकारी ने बताया कि इस दौरान रात 12:25 पर एक जवान को गोली लगी। वह मकान के एक शेड के करीब गिर पड़ा। तब अपनी जान की परवाह किए बिना नजीर ने फायरिंग के बीच घायल जवान को किसी तरीके से वहां से निकाला। इस दौरान आतंकी लगातार फायर करते रहे। उन्होंने बताया कि जांबाजी की मिसाल पेश करते हुए नजीर मुठभेड़ के दौरान उस मकान में दाखिल हुए और जहां आतंकी छुपे हुए थे। उन्होंने लश्कर के डिस्ट्रिक्ट कमांडर सहित एक विदेश आतंकी को मौत के घाट उतार दिया। इस दौरान नजीर के शरीर और सर पर गोलियां लगीं। तब भी वे एक तीसरे आतंकी को भी घायल कर दिया। तब तक बाकी जवान भी मकान में दाखिल हुए और बचे आतंकियों को मौत के घाट उतारा। घायल नजीर को सैन्य अस्पताल ले जाया गया, लेकिन बाद में दम तोड़ दिया। 26 जनवरी 2019 को गणतंत्र दिवस के मौके पर दिल्ली में राष्ट्रपति द्वारा नजीर को अशोक चक्र से नवाजा गया। अवार्ड को नजीर की पत्नी महजबीन ने लिया। बता दें कि नजीर के परिवार में उसकी पत्नी और दो बेटे अथर और शैद हैं।