रियासी। पौनी की रहने वाली पूजा राजपुत पुत्री छत्तर सिंह के साहस की बदौलत ही मंगलवार को लगभग डेढ़ वर्षीय मासूम की जिंदगी बच पाई। पूजा के इस साहसिक कार्य के लिए पुलिस विभाग ने उसको सम्मानित भी किया। इसके साथ ही उसकी बहादुरी और साहसिक कार्य की हर तरफ सराहना हो रही है।
मंगलवार को कटड़ा से श्री शिवखोड़ी धाम जा रहे गाजीपुर उत्तर प्रदेश निवासी अनूप गुप्ता ने परिवार संग एडवेंचर उठाने के लिए दरिया चिनाब में राफ्टिंग का मन बनाया। इस दौरान राफ्ट में उनके सहित उनकी मां पत्नी भाई व डेढ़ वर्षीय मासूम को भी बिठाया गया। मासूम को छोड़ कर सभी को लाइफ जैकेट पहनाई गई। दरिया चिनाब की उफनती लहरों के बीच राफ्ट पुल के पास पहुंची तो कमजोर पैंडलिंग के कारण राफ्ट पुल के पिलर के साथ टकरा कर पलट गई। इस दौरान अनूप गुप्ता के परिवार के साथ ही उसमें सवार अन्य दो युवतियां भी दरिया के पानी में गिर गई। गनीमत रहा कि मासूम बच्चे को उसकी मां पिंकी ने पकड़ा हुआ था। स्वयं गोते खाने के बाद भी उसने बच्चे को नहीं छोड़ा। इसी दौरान पूजा राजपूत ने बच्चे को बचाने के लिए उसे उसकी मां से लेने की कोशिश की। बताया जाता है कि इस दौरान पिंकी ने पहले तो यह सोच कर बच्चे को नहीं दिया कि पता नहीं यह लड़की कौन है, लेकिन बाद में पूजा की हिम्मत और साहस देख उसने बच्चे को उसे थमा दिया, जिसके बाद पूजा बच्चे को सकुशल बाहर ले आई। पूजा के साथ उसकी सहेलियों व स्थानीय युवाओं ने भी गुप्ता परिवार को बचाने में अहम भूमिका निभाई। पुलिस ने इस संदर्भ में मामला भी दर्ज किया हुआ है।
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जैकेट पहनते समय बच्चे ने रोना शुरू कर दिया
रियासी। डेढ़ वर्षीय मासूम को बिना लाइफ जैकेट पहनाए ही राफ्टिंग करने के लिए राफ्ट पर चढ़ा दिया गया। बताया जाता है कि लाइफ जैकेट पहनते समय बच्चे ने रोना शुरू कर दिया, जिसके बाद उसको गोद में बिठा लिया गया। हालांकि इस दौरान राफ्टिंग वालों ने उसका कोई भुगतान नहीं लिया, लेकिन लोगों का कहना है कि अगर बच्चा रो रहा थी तो उसको उसकी मां सहित दरिया चिनाब में उतारना ही नहीं चाहिए था। उनको किनारे पर रहने देना चाहिए था, लेकिन अन्य यात्री राफ्ट को छोड़ कर नहीं चले जाएं। इसके लालच में बच्चे को सभी के साथ बिठा लिया गया। बताया जाता है कि दरिया चिनाब में राफ्टिंग के लिए आए दिन नियमों को ताक पर रखा जाता है, जोकि आए दिन किसी की जान पर बन सकता है। ब्यूरो