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लाल सिंह उधमपुर-डोडा तो पूर्व आईजीपी जम्मू-डोडा से लड़ेंगे चुनाव

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कठुआ। लोकसभा चुनाव की घोषणा के बाद डोगरा स्वाभिमान संगठन ने बड़ा ऐलान किया है। मंगलवार को डोगरा स्वाभिमान संगठन के जम्मू कार्यालय में घंटों चली पदाधिकारियों की बैठक के बाद जम्मू-पुंछ और उधमपुर-डोडा सीट के प्रत्याशियों की घोषणा कर दी गई। इसके साथ ही यह भी साफ किया कि संगठन किसी भी राजनीतिक दल के साथ चुनावों में गठबंधन नहीं कर रहा है। संगठन अपने बूते पर चुनाव लड़ेगा।
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डीएसएस के राज्य प्रवक्ता एडवोकेट कीर्ति भूषण महाजन ने बताया कि उधमपुर-डोडा लोकसभा क्षेत्र से दो बार सांसद रहे चौधरी लाल सिंह इस बार भी उधमपुर-डोडा सीट से लोकसभा चुनाव लडेंगे। वहीं, पूर्व आईजीपी डॉ. कमल सैनी डोगरा स्वाभिमान संगठन की टिकट पर जम्मू-पुंछ सीट से लोकसभा चुनाव लडेंगे। संगठन के पदाधिकारियों की बैठक में यह अहम फैसले लिए गए हैं, जिसके बाद कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारियां सौंपने का काम शुरू हो गया है। वीरवार को कठुआ में बैठक के दौरान पार्टी का मैनिफेस्टो जारी किया जाएगा।
जम्मू में आयोजित बैठक के दौरान चौधरी लाल सिंह ने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया है कि जनता के बीच जाकर भाजपा सहित अन्य राजनीतिक दलों की असलियत सामने लाएं। डोगरों के हक के लिए संघर्ष संगठन की प्राथमिकता है। लोकसभा क्षेत्र में सांसदों के झूठे वादे और विकास के दावों की हकीकत जनता के सामने रखी जाएगी। इसके साथ ही डोगरों के स्वाभीमान को कभी आंच नहीं आने दी जाएगी।
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चौधरी लाल सिंह ने 1996 से राजनीति में
चौधरी लाल सिंह ने एक छात्र नेता के रूप में अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की। 1996 में विस चुनाव में तिवारी कांग्रेस की टिकट पर निर्वाचन क्षेत्र से विधायक चुने गए। 2002 के विस चुनाव में बसोहली से विधायक के रूप में फिर चयन हुआ। उन्हें तत्कालीन कांग्रेस-पीडीपी गठबंधन सरकार में स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा मंत्री के रूप में राज्य मंत्रिमंडल में शामिल किया गया, जिसके बाद उनकी लोकप्रियता और भी बढ़ी। 2004 में 14वीं लोकसभा में उधमपुर-डोडा निर्वाचन क्षेत्र से कांग्रेस की टिकट पर लाल सिंह सांसद चुने गए। 2009 में 15वीं लोकसभा में कांग्रेस की ही टिकट पर फिर इसी सीट से सांसद चुना गया। 2014 के आम चुनाव में कांग्रेस की ओर से उधमपुर-डोडा लोकसभा क्षेत्र की टिकट गुलाम नबी आजाद को दिए जाने के बाद लाल सिंह भाजपा में शामिल हुए। भाजपा की टिकट पर लाल सिंह एक बार फिर बसोहली विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीते और पीडीपी-भाजपा गठबंधन सरकार में बतौर स्वास्थ्य मंत्री और उसके बाद वन एवं पर्यावरण मंत्री रहे। रसाना मामले में पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती के दबाव के बाद लाल सिंह ने भी चंद्र प्रकाश गंगा के साथ मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया, जिसके बाद से ही लगातार वह भाजपा से किनारा करते रहे। इसी दौरान उन्होंने डोगरा स्वाभिमान संगठन की स्थापना की, जो पहले गैर राजनीतिक तौर पर रसाना कांड की सीबीआई जांच की मांग करता रहा तो वहीं पंचायत और निकाय चुनाव में प्रत्याशियों को समर्थन के साथ ही संगठन का राजनीतिक गलियारे में उतरना लगभग तय हो चुका था।
डा. कमल सैनी की रही है स्वच्छ छवि
डोगरा स्वाभिमान संगठन की टिकट पर जम्मू-पुंछ से चुनावी मैदान में उतरे डा. कमल सैनी एक ईमानदार स्वच्छ छवि वाले पुलिस अधिकारी रहे हैं। लगभग दो दशक पूर्व कमल सैनी कठुआ में बतौर डिप्टी एसपी सेवाएं दे चुके हैं। जानकारों के अनुसार अपने कार्यकाल में उन्हें पुलिस के कड़े अफसरों में से एक माना जाता रहा है। कठुआ में पोस्टिंग के दौरान अपराधियों में उनके नाम के बाद ही सनसनी फैल जाती रही। लोगों के अनुसार शहर से अपराध को लगभग खत्म करने और शराब के अवैध धंधे पर भी डा. कमल सैनी ने सख्ती से प्रहार किया था जिससे उनकी छवि कठुआ में सिंघम की रही है। जानकारी के अनुसार 2014 में डा. कमल सैनी ने पीडीपी का दामन थामा था, जिसके बाद से वह राजनीति में सक्रिय रहे हैं।
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