कठुआ। राज्य में अव्यवस्था के लिए कांग्रेस, नेकां ने हमेशा ही जम्मू-कश्मीर में चुनावी प्रक्रिया का दुरुपयोग किया है। देश को आजादी मिलने के बाद से ही कांग्रेस और नेकां ने प्रशासनिक मशीनरी का दुरुपयोग करते हुए चुनावी प्रक्रिया का मजाक बनाया। गैर सत्तारूढ़ दलों के नामांकनों को रद्द करने या फिर सत्तारूढ़ दलों के प्रत्याशियों को निर्विरोध जिताने के लिए सरकारी मशीनरी का इन दलों ने उपयोग किया। ये बातें पीएमओ में मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने बनी में आयोजित एक जनसभा के दौरान कहीं।
उन्होंने कहा कि 1950 और 1960 से ऐसा होता रहा और बड़ा बदलाव 1987 के चुनाव में आया जब सत्तारूढ़ पार्टी ने युवा नेताओं को हराने के लिए इस हथकंडे का प्रयोग किया। बाद में युवा आतंक का रास्ता अपनाने लगे और राज्य को अशांति की कगार पर लाकर खड़ा कर दिया। डॉ. सिंह ने अनुच्छेद 35-ए के मामले पर कहा कि नेकां और पीडीपी ने जिस तरह से निकाय चुनाव के दौरान चुनाव बहिष्कार किया था, वह मामला अभी तक सुलझा नहीं है, ऐसे में ये विधानसभा चुनाव में आखिर क्यों भाग ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि ये पार्टियां सिर्फ अपने स्वार्थ के लिए लोगों को गुमराह कर रही हैं।