नौशेरा। रविवार को 10वें दिन भी नौशेरा पूरी तरह बंद रहा। जिला के लिए आंदोलन से जुड़े संगठनों ने फिर रविवार को भी अपनी एकता का परिचय देते हुए कसबे में प्रदर्शन किया और सरकार को चेतावनी दी कि वह जल्द से जल्द नौशेरा को जिले का दर्जा दे। ऐसा नहीं होने पर वे आंदोलन को उग्र रूप देने पर मजबूर होंगे। नौशेरा व्यापार मंडल के बैनर तले रविवार को दसवें दिन भी बाजार पूरी तरह बंद रहा। बाजार में एक भी दुकान नहीं खुलने से स्थानीय लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन जिला के लिए चल रहे आंदोलन में उनका भरपूर समर्थन मिल रहा है। इतना ही नहीं, आंदोलन का विस्तार भी हो रहा है।
रविवार को नौशेरा को जिला बनाने की मांग पर विभिन्न संगठनों के लोग पटेल चौक पर एकत्र हुए। यहां से उन्होंने रैली निकाली। रैली जंगल चौक से होते हुए मुख्य बस अड्डे पर पहुंची। यहां लोगों ने सड़क जाम कर राज्य सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। यहां लोगों ने राज्य सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की। लोग नारे लगा रहे थे-छीन कर लेंगे, अपना हक। लाठी-गोली खाएंगे, नौशेरा को जिला बनाएंगे। जिन-जिन इलाकों से रैली गुजरी वहां से बड़ी संख्या में लोग रैली में शामिल होते गए। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि सरकार को यह समझना चाहिए कि आखिर बाजार बंद है तो लोगों को कितनी समस्याएं होती होंगी।बच्चों को दूध नहीं मिल रहा है, आम लोग राशन नहीं खरीद पा रहे हैं, लेकिन वे आंदोलन में डटे हुए हैं। आखिर इतनी मुसीबत के बाद भी हजारों लोग क्यों नौशेरा को जिला बनाने के आंदोलन में साथ खड़े हैं, सरकार को इस बात पर संवेदनशीलता के साथ विचार करना चाहिए। प्रतिदिन दूर-दूर से सैकड़ों लोगों के जत्थे नौशेरा में पहुंचते हैं, ताकि वे आंदोलन में शामिल हो सकें। इन सबके पीछे कुछ तो वहज होगी।
आज से करेंगे चक्काजाम
नौशेरा व्यापार मंडल के प्रधान सुभाष कपूर ने कहा कि नौशेरा को जिला बनाने के आंदोलन में शामिल विभिन्न संगठनों की तरफ से पिछले 10 दिनों से लगातार सरकारी कार्यालय, बैंकों, डाकघर को बंद करवाया जा रहा है, लेकिन सरकार नहीं चेत रही है। ऐसे में उन्होंने सोमवार से चक्काजाम करने का निर्णय लिया है। हम अभी तक शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात उठाते रहे हैं, लेकिन अब धीरे-धीरे आंदोलन को उग्र किया जाएगा, क्योंकि लगता है सरकार के कानों तक हमारी आवाज नहीं पहुंच रही है।
हालात ने सड़क पर उतरने को किया मजबूर
रविवार को भी दूरदराज से बड़ी संख्या में ग्रामीण नौशेरा पहुंचे और आंदोलन में शामिल हुए। ग्रामीणों ने कहा कि वे पाकिस्तानी गोलाबारी वर्ष 1947 से झेल रहे हैं। कई बार वे अपने गांवों से उजड़ चुके हैं, लेकिन कभी शांति का रास्ता नहीं छोड़ा। ग्रामीणों ने कहा कि जो सरकार हम चुनते हैं, उन्हें भी हमारा दर्द समझना चाहिए। सीमावर्ती इलाकों में सुविधाएं नहीं हैं। रोजगार के साधन नहीं हैं। परिवहन की सुविधा नहीं होने से मीलों उनको पैदल चलना पड़ता है। अस्पताल नहीं हैं यदि किसी इलाके में हैं भी तो वहां चिकित्सक और अन्य स्टाफ बहुत कम हैं। उनके बच्चों के लिए उच्च शिक्षा तो छोड़ ही दीजिए, हायर सेकेंडरी की पढ़ाई पूरी करने की भी सुविधा नहीं है। ऐसे में वे पूरे मन से नौशेरा को जिला बनाने के आंदोलन में शामिल हो रहे हैं। जिला बनता है तो सीमावर्ती गांवों में भी सुविधाएं बढ़ेंगी। इसलिए अब हम पीछे नहीं हटेंगे। अन्य दिनों की तरह ही रविवार को भी नौशेरा बंद का असर नगर के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में भी देखा गया।
प्रदर्शनकारियों से मिले पहाड़ी बोर्ड के चेयरमैन
रविवार को भाजपा के पहाड़ी बोर्ड के चेयरमैन कुलदीप राज गुप्ता नौशेरा पहुंचे और आंदोलन में शामिल संगठनों के लोगों से बातचीत की। गुप्ता ने कहा कि नौशेरा बहुत पुरानी तहसील है। इसे जिला बनाने की मांग जायज है। इसलिए वे इस बारे में रियासत की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती से बात करेंगे। उन्होंने लोगों से कहा कि उनकी पूरी कोशिश होगी कि इस मुद्दे का जल्द से जल्द समाधान हो सके।