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मचैल यात्रा बनी मातम यात्रा: 14 लोग गए थे दर्शन को, दो लौटे ही नहीं…हादसे ने तोड़कर रख दिया पूरा परिवार

Sun, 17 Aug 2025 05:36 AM IST
निकिता गुप्ता अमर उजाला, नेटवर्क जम्मू

सार

रामनगर और रियासी के पीड़ितों ने बताया कि कैसे चंद पलों में सारा मंजर तबाही में बदल गया।
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किश्तवाड़ के चिशोती में बादल फटने की त्रासदी ने कई घरों को गम में डुबो दिया। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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किश्तवाड़ के चिशोती में बादल फटने की त्रासदी ने कई घरों को गम में डुबो दिया। कई लोग अब भी सदमे में हैं, कई परिवारों के जख्म शायद ही कभी भर पाएं। ऐसा ही एक परिवार है उधमपुर के रामनगर इलाके के मोहनलाल का, जिनके लिए यह यात्रा जीवन का सबसे बड़ा सदमा बन गई।

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जीएमसी में अपने घायल भाई प्रदीप के पास मौजूद आंखों में आंसू और आवाज में दर्द लिए मोहनलाल ने बताया कि परिवार के कुल 14 लोग बड़े उत्साह से माता के दर्शन के लिए निकले थे। वापसी पर ऐसा तूफान आया कि सब कुछ तहस-नहस हो गया। मेरे फूफा की मौके पर ही मौत हो गई, भतीजी को भी नहीं बचाया जा सका। बड़े भाई और भाभी गंभीर रूप से घायल हैं भर्ती हैं। हादसे के दौरान बच्चे भी साथ थे, जो सही-सलामत हैं, लेकिन उनकी आंखों में डर अब भी साफ दिख रहा है।

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धूल का गुबार उठा और फिर सैलाब... सब कुछ बहता चला गया
रियासी जिले के रहने वाले भारत भूण भी अपने परिवार के साथ माता के दर्शन को गए थे। हादसे के वक्त वे दर्शन करके लौट रहे थे। उन्होंने बताया कि हम टेम्पो से लौट रहे थे, अचानक तेज गड़गड़ाहट हुई, ऊपर देखा तो पहाड़ी से मलबा और पानी बह रहा था। कुछ समझ ही नहीं आया।

लोग इधर-उधर भागने लगे, किसी को कुछ नहीं सूझ रहा था। मेरे साथ मेरे भाई भी थे। हम दोनों फिसल कर गिर गए। हमें चोटें आईं, पर भगवान की कृपा रही कि परिवार के बाकी लोग बच गए। भारत भूषण की आंखों में अब भी डर बैठा है। उन्होंने बताया कि उन्होंने पहली बार किसी आपदा को इतने पास से देखा। लोग पानी में बहते चले गए, कोई किसी को नहीं पकड़ पाया। एक बच्चा तो बार-बार ‘मम्मी मम्मी’ चिल्ला रहा था… वो आवाज आज भी कानों में गूंज रही है।
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