किश्तवाड़ के चिशोती में बादल फटने की त्रासदी ने कई घरों को गम में डुबो दिया।
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किश्तवाड़ के चिशोती में बादल फटने की त्रासदी ने कई घरों को गम में डुबो दिया। कई लोग अब भी सदमे में हैं, कई परिवारों के जख्म शायद ही कभी भर पाएं। ऐसा ही एक परिवार है उधमपुर के रामनगर इलाके के मोहनलाल का, जिनके लिए यह यात्रा जीवन का सबसे बड़ा सदमा बन गई।
जीएमसी में अपने घायल भाई प्रदीप के पास मौजूद आंखों में आंसू और आवाज में दर्द लिए मोहनलाल ने बताया कि परिवार के कुल 14 लोग बड़े उत्साह से माता के दर्शन के लिए निकले थे। वापसी पर ऐसा तूफान आया कि सब कुछ तहस-नहस हो गया। मेरे फूफा की मौके पर ही मौत हो गई, भतीजी को भी नहीं बचाया जा सका। बड़े भाई और भाभी गंभीर रूप से घायल हैं भर्ती हैं। हादसे के दौरान बच्चे भी साथ थे, जो सही-सलामत हैं, लेकिन उनकी आंखों में डर अब भी साफ दिख रहा है।